

सूरजपुर : सूरजपुर के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय ने साले की हत्या कर साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से शव को बांध में फेंकने के गंभीर मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह के न्यायालय ने समग्र साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुख्य आरोपी सुखसाय उर्फ गंवटिया को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, इस अपराध में शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य छुपाने में मदद करने वाले उसके पिता महाबीर बरगाह को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया गया है।
बांध में तैरते पैर से खुला था अंधे कत्ल का राज
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत 11 सितंबर 2021 को हुई थी। ग्राम बलदेवनगर निवासी मनोज उरांव ने थाना प्रेमनगर में सूचना दी कि बांगों बांध के डुबान क्षेत्र (छोटे छुरी) में पानी के ऊपर एक व्यक्ति का पैर दिखाई दे रहा है। सूचना मिलते ही प्रेमनगर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और रस्सी के सहारे पानी में दिख रहे पैर को खींचकर शव को बाहर निकाला।
शव की स्थिति देखकर पुलिस के होश उड़ गए, क्योंकि मृतक के गले में रस्सी बंधी हुई थी। पुलिस ने तत्काल शून्य पर मर्ग कायम किया और पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
गुमशुदगी और पुलिस की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने साफ तौर पर उल्लेख किया कि मृतक की मृत्यु स्वाभाविक नहीं थी, बल्कि उसकी गला घोंटकर हत्या (Homicidal Death) की गई थी। इसके बाद प्रेमनगर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 85/21 के तहत भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की शिनाख्त सुरेन्द्र यादव (उम्र 22 वर्ष), निवासी हनुमानगढ़, थाना रामानुजनगर के रूप में की। विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि सुरेन्द्र 5 सितंबर को अंबिकापुर स्थित अपनी दीदी और जीजा के घर गया था। वहां से वह अपने जीजा सुखसाय उर्फ गवटियां बरगाह के साथ उसके बेटे को लेने के लिए विंध्यांचल गया था। अगले दिन सुखसाय अकेले अपने बेटे को लेकर अंबिकापुर लौटा। जब सुरेन्द्र की दीदी ने अपने भाई के बारे में पूछा, तो सुखसाय ने झूठ बोल दिया कि सुरेन्द्र प्रेमनगर में उतरकर अपने घर चला गया है।
जीजा के बयानों में विरोधाभास और संदेह होने पर प्रेमनगर पुलिस ने सुखसाय को हिरासत में लिया और कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद हत्या की पूरी खौफनाक कहानी सामने आ गई।
दस्तावेज फाड़ने के विवाद पर हुई थी हत्या
पूछताछ में आरोपी सुखसाय ने स्वीकार किया कि 5 सितंबर 2021 की रात विंध्यांचल स्थित मकान में उसका सुरेन्द्र के साथ विवाद हुआ था। विवाद की वजह यह थी कि सुरेन्द्र ने सुखसाय के पिता के मेडिकल दस्तावेज को फाड़ दिया था। इस बात से आक्रोशित होकर सुखसाय ने पास ही रखी लकड़ी की पराठी उठाई और सुरेन्द्र के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। सिर पर चोट लगने के बाद सुखसाय ने रस्सी से सुरेन्द्र का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
पिता के साथ मिलकर साक्ष्य छुपाने का प्रयास
हत्या की इस वारदात को अंजाम देने के बाद सुखसाय ने अपने पिता महाबीर बरगाह को घटना की जानकारी दी। दोनों ने मिलकर कानूनी कार्रवाई से बचने और साक्ष्य छुपाने की योजना बनाई। उन्होंने सुरेन्द्र के शव को एक बोरे में भरा और उसे साइकिल पर लादकर छोटे छुरी बांध के डुबान क्षेत्र में ले गए। शव और साइकिल आसानी से पानी के ऊपर न आ सकें, इसके लिए उन्होंने लाश और साइकिल में भारी पत्थर बांधे और उन्हें बांध के गहरे पानी में फेंक दिया।
वैज्ञानिक साक्ष्य और अभियोजन की मजबूत पैरवी
मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचक और उप निरीक्षक (SI) निर्मल राजवाड़े ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुख्ता वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य संकलित किए। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त सामग्री बरामद की और एक मजबूत आरोप पत्र सूरजपुर न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सिंह कुशवाहा ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अकाट्य साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिससे आरोपियों का बच निकलना असंभव हो गया।
न्यायालय का अंतिम फैसला
मामले की पूरी सुनवाई करने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए निम्नलिखित सजा मुकर्रर की:
सुखसाय उर्फ गंवटिया (मुख्य आरोपी): धारा 302 भारतीय दण्ड संहिता के तहत आजीवन कारावास। इसके साथ ही धारा 201 और 34 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 200 रुपये का अर्थदण्ड।
महाबीर बरगाह (सह-आरोपी/पिता): धारा 201 और 34 भारतीय दण्ड संहिता के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100 रुपये का अर्थदण्ड।
अर्थदण्ड की राशि जमा न करने की स्थिति में आरोपियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस फैसले के बाद क्षेत्र में पुलिस की तत्परता और न्यायिक प्रणाली के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।