सूरजपुर, : खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन (खरीदी) के लिए किसान पंजीयन की समय-सीमा की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, राज्य भर के पात्र किसान 01 जुलाई 2026 से लेकर 31 अक्टूबर 2026 तक नवीन पंजीयन और अपने पूर्व विवरणों में आवश्यक संशोधन करा सकेंगे। कलेक्टर ने सूरजपुर जिले के सभी किसानों से समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा करने का आग्रह किया है ताकि आगामी धान बिक्री के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक असुविधा का सामना न करना पड़े।
पुराने पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अपना सफल पंजीयन कराया था, उन्हें इस वर्ष पुनः नया पंजीयन कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यदि ऐसे किसानों के भूमि रिकॉर्ड, खसरा नंबर, रकबा (क्षेत्रफल), बैंक खाता संख्या, या पारिवारिक कारणों जैसे नामांतरण, बंटवारा, अथवा फौती (उत्तराधिकार) के कारण किसी भी प्रकार का बदलाव हुआ है, तो वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक संशोधन करा सकते हैं। यह संशोधन कार्य संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के माध्यम से संपन्न किया जाएगा।
सभी श्रेणियों के लिए ‘एग्रीस्टैक’ (Farmer ID) अनिवार्य
इस वर्ष की पंजीयन प्रक्रिया में शासन द्वारा एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब सभी श्रेणी के किसानों के लिए एग्रीस्टैक (किसान आईडी) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
नए किसानों के लिए प्रक्रिया: ऐसे किसान जो पहली बार शासकीय व्यवस्था के तहत धान बेचना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले एग्रीस्टैक पोर्टल पर जाकर अपना पंजीयन कराना होगा। वहां से एग्रीस्टैक आईडी प्राप्त होने के बाद ही वे अपनी संबंधित समिति में आवश्यक दस्तावेज (भूमि, खसरा, बैंक खाता और नॉमिनी विवरण) जमा कर सकेंगे।
विशेष श्रेणियों के लिए भी अनिवार्य: शासन ने यह भी साफ किया है कि वनाधिकार पट्टाधारी, डूबान क्षेत्र के कृषक, शासकीय पट्टेदार, संस्थागत कृषक तथा अधिया या रेगहा (बटाई) के माध्यम से खेती करने वाले किसानों के लिए भी एग्रीस्टैक पंजीयन कराना पूरी तरह अनिवार्य रहेगा।
आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली से होगी खरीदी
पारदर्शिता बनाए रखने और गड़बड़ियों को रोकने के लिए धान उपार्जन की पूरी प्रक्रिया पिछले वर्षों की तरह ही आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली (Biometric Authentication) के माध्यम से पूरी की जाएगी। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पंजीयन के समय ही किसान के साथ-साथ उनके द्वारा मनोनीत एक ‘नामिनी’ (प्रतिनिधि) का भी आधार विवरण दर्ज किया जाएगा। यदि धान बिक्री के समय किसान स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ रहता है, तो नामांकित नामिनी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए धान की बिक्री संपन्न करा सकेगा।
कलेक्टर की अपील: अंतिम तिथि का न करें इंतजार
सूरजपुर जिले के कलेक्टर ने क्षेत्र के सभी सीमांत, लघु और बड़े कृषकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथियों की भीड़भाड़ और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 से पहले ही अपने नजदीकी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति या उपार्जन केंद्र में पहुंचें। सभी आवश्यक मूल दस्तावेजों को साथ ले जाकर समय पर पंजीयन और संशोधन की प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उनकी उपज की बिक्री बिना किसी बाधा के हो सके।