बलरामपुर : बसंतपुर पशु तस्करी के मामलों पर नकेल कसते हुए बसंतपुर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। लंबे समय से फरार चल रहे दो अंतर्राज्यीय पशु तस्करों को पुलिस ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इन आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था।
फरार आरोपियों की प्रतापगढ़ में हुई गिरफ्तारी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:
आलम: पिता हकीम अली, उम्र 28 वर्ष, निवासी रामपुर बजहा, थाना मान्धाता, जिला प्रतापगढ़ (उ.प्र.)।
अजय सिंह: पिता शिवबरन सिंह, निवासी ग्राम पोस्ट रेडबीर, थाना मोहनगंज, जिला प्रतापगढ़ (उ.प्र.)।
ये दोनों आरोपी घटना के बाद से ही अपनी पहचान छुपाकर फरार चल रहे थे, जिन्हें पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यूपी से दबोच लिया।
क्या था पूरा मामला?
मामले का संक्षिप्त विवरण यह है कि 18 दिसंबर 2025 को बसंतपुर पुलिस को मुखबिर से गुप्त सूचना मिली थी कि एक टाटा ट्रक (क्रमांक UP-70 MT 6909) में क्रूरतापूर्वक भैंसों को लादकर अवैध रूप से उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बसंतपुर मेन गेट के सामने सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया।
चेकिंग के दौरान उक्त ट्रक को आता देख पुलिस ने उसे रोकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने रुकने के बजाय वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और भागने का प्रयास किया। पुलिस पार्टी ने तत्काल पीछा किया, जिसके बाद आरोपी वाहन को बकवरिया थाना बीजपुर के पास लावारिस छोड़कर फरार हो गए।
जांच और तकनीकी साक्ष्यों से हुआ खुलासा
विवेचना के दौरान पुलिस ने जब वाहन स्वामी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि वाहन चालक अजय सिंह था और पशुओं की तस्करी का मुख्य मास्टरमाइंड आलम था, जिसने भैंसों की खेप मंगवाई थी। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों (मोबाइल लोकेशन व अन्य) और मुखबिर की मदद से प्रतापगढ़ में दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए जेल
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 223/2025 के तहत छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6, 10, पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11(1-घ) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (2-ख) के तहत कार्रवाई की है। आरोपियों को माननीय न्यायालय वाड्रफनगर के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।