सूरजपुर : ज़िले के थाना रमकोला अंतर्गत ग्राम डांडकरवां के स्कूलपारा में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय प्रतापपुर के न्यायाधीश ओमप्रकाश सिंह चौहान ने पुरानी ज़मीनी रंजिश के कारण ग्रामीण की कुल्हाड़ी (टांगी) से हत्या करने के जुर्म में आरोपी धर्मजीत को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने 1,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर अभियुक्त को 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
जानलेवा हमले का पूरा घटनाक्रम
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 21 अक्टूबर 2024 की दोपहर लगभग 3:30 बजे ग्राम डांडकरवां के स्कूलपारा में घटी। आरोपी धर्मजीत और पीड़ित लरंग साय के बीच लंबे समय से ज़मीन को लेकर विवाद चल रहा था इसी पुरानी रंजिश के चलते घटना के दिन दोनों के बीच तीखी बहस और विवाद हो गया।
विवाद के उग्र रूप धारण करने पर धर्मजीत ने पास रखी कुल्हाड़ी (टांगी) से लरंग साय पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपी ने पीड़ित की पीठ, गर्दन और कान के पास घातक वार किए, जिससे गंभीर चोटें आने के कारण लरंग साय की मौके पर ही मौत हो गई।
त्वरित कार्रवाई और विवेचना
घटना की सूचना मिलने पर थाना रमकोला में अपराध क्रमांक 25/2024 दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मामला कायम किया गया। घटना के अगले ही दिन, 22 अक्टूबर 2024 को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी धर्मजीत (उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम रमकोला) को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।
मामले की विस्तृत विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी व निरीक्षक प्रमोद किस्पोट्टा द्वारा की गई। जांच अधिकारी ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया, प्रत्यक्षदर्शियों एवं गवाहों के बयान दर्ज किए, घटना में प्रयुक्त हथियार (टांगी) को ज़ब्त किया और मृतक का पोस्टमार्टम कराकर चिकित्सीय साक्ष्य जुटाए।
अदालत का फैसला
जांच पूर्ण होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अपर सत्र न्यायालय प्रतापपुर में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अक्षय तिवारी ने पैरवी की। अभियोजन ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और चिकित्सकीय साक्ष्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से रखा।
न्यायाधीश ओमप्रकाश सिंह चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद 19 अगस्त 2026 को अपना अंतिम निर्णय सुनाया। न्यायालय ने माना कि आरोपी धर्मजीत ने जानबूझकर और रंजिश के तहत लरंग साय पर प्राणघातक हमला किया था, जिससे उसकी मृत्यु हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों की मजबूती के आधार पर आरोपी धर्मजीत को धारा 103(1) BNS के तहत दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास तथा अर्थदंड की सजा से दंडित किया।