
सूरजपुर : जिले के विकासखंड ओड़गी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रैसरा में शासकीय व्यवस्थाओं और जनसुरक्षा के दावों की पोल खोलती एक गंभीर स्थिति सामने आई है। गांव में संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान का भवन इस कदर जर्जर और खस्ताहाल हो चुका है कि यहां हर दिन ग्रामीण और राशन वितरण करने वाले कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखकर पहुंचने को मजबूर हैं। करीब 12 वर्ष पूर्व निर्मित यह भवन रख-रखाव के अभाव में अब जमींदोज होने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे कभी भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
भवन की जमीनी स्थिति: दीवारों में दरारें, छत से टपक रहा पानी
स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार, 12 साल पुराने इस भवन की हालत बीते कुछ वर्षों में बेहद चिंताजनक हो चुकी है। भवन की छत और दीवारों से प्लास्टर की बड़ी-बड़ी परतें भरभरा कर गिर रही हैं। छत को सहारा देने वाली मुख्य बीमों और पक्की दीवारों में चौड़ी-चौड़ी दरारें स्पष्ट देखी जा सकती हैं। मानसून के दिनों में स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है; छत में व्यापक सीपेज होने के कारण बारिश का पानी सीधे दुकान के अंदर टपकता है।
हर महीने राशन वितरण के दौरान दुकान परिसर में सैकड़ों कार्डधारियों की भारी भीड़ जमा होती है। संकरे और कमजोर हो चुके इस भवन के भीतर घंटों खड़े रहकर राशन प्राप्त करना ग्रामीणों के लिए किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि वितरण के दौरान यदि अचानक छत का कोई हिस्सा या जर्जर दीवार भरभरा कर गिर जाती है, तो बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि हो सकती है।
⚠️ खाद्यान्न सुरक्षा पर मंडराता संकट
भवन की जर्जर छत से पानी के सतत रिसाव के कारण गोदाम में रखे गरीबों के राशन—चावल, शक्कर, नमक, चना और दालों—के सीलने और सड़ने का गंभीर खतरा बना हुआ है। सरकारी अनाज के खराब होने से न केवल शासकीय संपत्ति की क्षति हो रही है, बल्कि दर्जनों गरीब परिवारों को गुणवत्तापूर्ण राशन से वंचित होना पड़ रहा है।
कलेक्टर जनदर्शन में गुहार, फिर भी नवीन भवन की स्वीकृति अधर में
ग्राम पंचायत रैसरा की ओर से इस जानलेवा समस्या को लेकर पूर्व में भी जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों को लिखित आवेदनों के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है।
जनदर्शन में औपचारिक आवेदन: ग्राम पंचायत रैसरा के सरपंच अशोक कुमार पैकरा की अगुवाई में 2 सितंबर 2025 को सूरजपुर कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में एक औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में जर्जर भवन की तस्वीरें और जमीनी वस्तुस्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया था।
स्वीकृति का इंतजार: आवेदन दिए जाने के बाद भी नवीन शासकीय उचित मूल्य दुकान भवन की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति अब तक लंबित है। जमीनी स्तर पर त्वरित तकनीकी निरीक्षण न होने से ग्रामीणों में गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
तत्काल तकनीकी निरीक्षण: लोक निर्माण विभाग (PWD) या राजस्व विभाग की तकनीकी टीम भेजकर जर्जर भवन का निरीक्षण कराया जाए और इसे असुरक्षित घोषित किया जाए।
नवीन भवन की तत्काल स्वीकृति: शासकीय उचित मूल्य दुकान हेतु नवीन सुसज्जित भवन निर्माण की राशि अविलंब स्वीकृत की जाए।
वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था: नए भवन के निर्माण तक राशन का वितरण किसी अन्य सुरक्षित शासकीय या सामुदायिक भवन से संचालित कराया जाए ताकि संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।
अब देखना यह होगा कि सूरजपुर जिला प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या और संभावित जान-माल के खतरे का संज्ञान लेकर कब तक कड़े कदम उठाता है, या फिर किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार किया जाएगा।