सूरजपुर : अनाथ, बेसहारा और बाल संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों को एक सुरक्षित और सुखद पारिवारिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूरजपुर के जिला पंचायत सभागार में ‘फॉस्टर केयर प्रोग्राम’ पर आधारित एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन कलेक्टर रेना जमील के निर्देशन और जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
संस्थागत जीवन की जगह पारिवारिक देखभाल प्राथमिकता: डॉ. वसुंधरा
कार्यशाला में दिल्ली से पधारीं फॉस्टर केयर प्रोग्राम की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. वसुंधरा ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत संचालित किया जाता है। इसका मूल उद्देश्य उन बच्चों को एक स्थायी या अस्थायी परिवार से जोड़ना है, जो किसी वजह से माता-पिता के संरक्षण से वंचित हैं या बाल सुधार/संरक्षण गृहों में जीवन बिता रहे हैं।
डॉ. वसुंधरा ने आगे की कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिले में ऐसे सभी बच्चों का चिन्हांकन किया जाएगा, जो अपने जैविक माता-पिता के बिना किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रहे हैं। इसके साथ ही, समाज के ऐसे सक्षम और इच्छुक परिवारों की भी पहचान की जाएगी, जो इन बच्चों को अपने घर में रखकर उनका लालन-पालन करने को तैयार हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी बच्चा पारिवारिक स्नेह से वंचित न रहे, यही इस पहल का मुख्य ध्येय है।
बाल संरक्षण, गुड टच-बैड टच और स्पॉन्सरशिप पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने ‘बाल विवाह मुक्त सूरजपुर’ अभियान के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों, पॉक्सो अधिनियम, सुरक्षात्मक उपायों तथा ‘गुड टच और बैड टच’ के प्रति बच्चों एवं समाज को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जिले में संचालित ‘स्पॉन्सरशिप योजना’ की प्रक्रियाओं और उसके लाभों से भी सभी अधिकारियों को अवगत कराया, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा और पोषण में मदद की जा सके।
विभागीय अधिकारियों की रही व्यापक मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के विभिन्न घटकों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में जिले के सभी परियोजना अधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के अधिकारी व कर्मचारी, सखी वन स्टॉप सेंटर के प्रतिनिधि, महिला सशक्तिकरण हब के सदस्य और चाइल्डलाइन की पूरी टीम मौजूद रही। सभी उपस्थित कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि वे धरातल पर जाकर ऐसे बच्चों और इच्छुक परिवारों को चिह्नित करने का कार्य तत्परता से शुरू करें।