बलरामपुर में छात्र सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त: 50 स्कूल बसों की औचक जांच, 13 पर जुर्माना

Deshkibaat24
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बलरामपुर : जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों पर त्वरित अमल करते हुए प्रशासन ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित होने वाली स्कूल और कॉलेज बसों के खिलाफ एक बड़ा औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इस एक दिवसीय विशेष चेकिंग अभियान के तहत सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ कड़ी चालानी कार्रवाई भी की गई।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के बाद त्वरित एक्शन
बीते 8 जून 2026 को जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बलरामपुर ने विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए थे। इसी तारतम्य में पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर (भापुसे) के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी के निर्देशन में जिला परिवहन, स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस संयुक्त टीम ने 12 जून 2026 को जिले के तीन प्रमुख केंद्रों— शंकरगढ़, रामानुजगंज और वाड्रफनगर में औचक निरीक्षण की कार्रवाई को अंजाम दिया।
50 बसों की हुई जांच, 13 वाहनों पर लगा जुर्माना
अभियान के दौरान क्षेत्र के सभी शैक्षणिक संस्थानों की बसों को जांच के लिए निर्धारित स्थानों पर बुलाया गया था। इस चेकिंग ड्राइव में कुल 50 बसें शामिल हुईं। प्रशासन द्वारा की गई मुस्तैद कार्रवाई का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

निरीक्षण केंद्रजांच की गई बसों की संख्यादोषी पाई गई बसें (चालान)
रामानुजगंज2008
शंकरगढ़1705
वाड्रफनगर1300
कुल योग5013

जांच के दौरान शंकरगढ़ की 5 बसें और रामानुजगंज की 8 बसों में गंभीर कमियां पाई गईं। इन सभी 13 बसों पर परिवहन विभाग द्वारा कुल 14,000/- रुपये का अर्थदंड (चालान) लगाया गया। साथ ही संबंधित स्कूल प्रबंधकों को सख्त लहजे में निर्देशित किया गया है कि वे वाहनों की कमियों को जल्द से जल्द दुरुस्त करें, अन्यथा भविष्य में वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के तहत परखे गए मानक
यह पूरी कार्रवाई माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा स्कूल बसों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों के तहत की गई। अधिकारियों ने वाहनों के दस्तावेजों से लेकर उनकी आंतरिक यांत्रिक (मैकेनिकल) स्थिति की बारीकी से पड़ताल की, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
दस्तावेजों का सत्यापन: वाहनों का पंजीकरण प्रमाण पत्र (आरसी बुक), मोटरयान कर (टैक्स) जमा होने की रसीद, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा (इंश्योरेंस), प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) और चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की गई।
मैकेनिकल फिटनेस: बसों की हेड लाइट, ब्रेक लाइट, पार्किंग लाइट, इंडिकेटर, स्टीयरिंग की स्थिति, टायरों की ग्रिप, वाइपर, हैंड ब्रेक, क्लच, एक्सीलेटर, हॉर्न, रिफ्लेक्टर और सीटों की भौतिक स्थिति को परखा गया। इसके साथ ही वाहनों में गति नियंत्रक यंत्र (स्पीड गवर्नर) चालू हालत में है या नहीं, इसकी भी जांच हुई।
चालकों का हुआ हेल्थ चेकअप, दी गई डॉक्टरी सलाह
इस अभियान की खास बात यह रही कि सिर्फ गाड़ियों की ही नहीं, बल्कि बच्चों को लाने-ले जाने वाले चालकों की सेहत की भी जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चालकों का शारीरिक परीक्षण किया गया।
जांच के दौरान जिन वाहन चालकों में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और मधुमेह (डायबिटीज) के लक्षण पाए गए, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करने की हिदायत दी गई। वहीं, जिन चालकों की आंखों की रोशनी (दृष्टि) कमजोर पाई गई, उन्हें गाड़ी चलाते समय अनिवार्य रूप से चश्मा लगाने की सख्त सलाह दी गई, ताकि किसी भी तरह की मानवीय चूक या दुर्घटना से बचा जा सके।
क्षमता से अधिक बच्चे बिठाने पर लगेगी रोक
निरीक्षण टीम ने सभी बस चालकों और परिचालकों को सख्त निर्देश दिए कि वे बसों में निर्धारित क्षमता (सिटिंग कैपेसिटी) से अधिक बच्चों को कतई न बैठाएं। ओवरलोडिंग पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सीधे तौर पर मामला दर्ज किया जाएगा। सभी को यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।

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