सूरजपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: PACL चिटफंड घोटाले में पंजाब से 2 और आरोपी डायरेक्टर गिरफ्तार, अब तक कुल 8 हत्थे चढ़े

Deshkibaat24
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सूरजपुर :  जिले में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित पीएसीएल (PACL) चिटफंड घोटाले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़प कर सालों से फरार चल रहे कंपनी के दो और शातिर डायरेक्टरों को पुलिस ने कवर्धा जिला जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए दोनों आरोपी मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं। इस नई कार्रवाई के बाद इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में सलाखों के पीछे पहुंचने वाले कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर अब 8 हो गई है।
कवर्धा जेल से प्रोडक्शन वारंट पर हुई गिरफ्तारी
चिटफंड कंपनियों के खिलाफ लंबित मामलों के त्वरित निराकरण और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए डीआईजी एवं एसएसपी सूरजपुर प्रशांत कुमार ठाकुर ने विशेष निर्देश जारी किए थे। इसी अभियान के तहत सूरजपुर थाना प्रभारी विमलेश दुबे के नेतृत्व में पुलिस टीम को तकनीकी साक्ष्यों और विवेचना के दौरान एक अहम सुराग मिला।
पुलिस को पता चला कि पीएसीएल कंपनी के दो वांछित डायरेक्टर वर्तमान में किसी अन्य मामले में जिला जेल कवर्धा में बंद हैं। सूचना मिलते ही सूरजपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए माननीय न्यायालय से आवश्यक प्रोडक्शन वारंट हासिल किया और कवर्धा जेल से दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर सूरजपुर ले आई।
गिरफ्तार किए गए नए आरोपियों की पहचान:
गुरजंट सिंह गिल उर्फ गुरजन सिंह (उम्र 82 वर्ष) – निवासी: मकान नंबर 2117, फेस 7, एसएएस नगर, थाना सेक्टर 71 मटौर (मोहाली), जिला मोहाली, पंजाब।
गुरूनाम सिंह (उम्र 77 वर्ष) – निवासी: मकान नंबर 05, जसरा, थाना चम्कौर साहब, जिला रूपनगर (रोपड़), पंजाब।
पैसा दोगुना करने का झांसा देकर की थी करोड़ों की ठगी
पुलिस की कड़ी पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कुबूल किया है कि उन्होंने कंपनी के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सूरजपुर जिले के सैकड़ों सीधे-साधे और मध्यमवर्गीय निवेशकों को अपना शिकार बनाया था। आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीके से लोगों को लुभावने ऑफर दिए और दावा किया कि कंपनी में पैसा लगाने पर निर्धारित समय (मैच्योरिटी अवधि) के भीतर रकम दोगुनी हो जाएगी।
ठगों के इस झांसे में आकर क्षेत्र के लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी कंपनी में दांव पर लगा दी। जब मैच्योरिटी की अवधि पूरी हुई और निवेशकों ने अपना पैसा वापस मांगा, तो डायरेक्टरों और कंपनी प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए और राशि लौटाने से साफ इनकार करते हुए दफ्तर बंद कर फरार हो गए।
सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज
इस महाघोटाले को लेकर सूरजपुर थाने में अपराध क्रमांक 182/2016 के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानून का कड़ा शिकंजा कसते हुए निम्नलिखित गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की है:
आईपीसी (भादसं) की धारा 420: धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना।
आईपीसी की धारा 120बी: आपराधिक साजिश रचना।
इनामी चिटफंड धन परिचालन स्कीम पाबंदी अधिनियम 1978 की धारा 4, 5, 6: अवैध रूप से धन का संचलन और स्कीम चलाना।
छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 (PDIE Act) की धारा 10: निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और हेरफेर पर सख्त सजा का प्रावधान।
पहले ही दबोचे जा चुके हैं 6 मुख्य सरगना
सूरजपुर पुलिस इस मामले में लगातार चौतरफा कार्रवाई कर रही है। इन दो नई गिरफ्तारियों से पहले पुलिस इस घोटाले के मास्टरमाइंड और मुख्य चेहरे निर्मल सिंह भंगू समेत 6 अन्य डायरेक्टरों को देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार कर चुकी है।
अब तक गिरफ्तार हो चुके सभी 8 आरोपियों की सूची:
निर्मल सिंह भंगू
त्रिलोचन सिंह
सुखदेव सिंह
जोगेन्दर टाईगर
गुरमीत सिंह
सुब्रत भट्टाचार्य
गुरजंट सिंह गिल (नई गिरफ्तारी)
गुरूनाम सिंह (नई गिरफ्तारी)
इस टीम को मिली कामयाबी
चिटफंड माफियाओं के खिलाफ चलाए गए इस सफल ऑपरेशन में सूरजपुर थाना प्रभारी विमलेश दुबे, सब-इंस्पेक्टर (एसआई) लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) संजय सिंह और आरक्षक जयप्रकाश सिंह की भूमिका अत्यंत सराहनीय और सक्रिय रही। पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि जिले में किसी भी चिटफंड ठग को बख्शा नहीं जाएगा और निवेशकों का पैसा वापस दिलाने के कानूनी प्रयास जारी रहेंगे।

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