जशपुर नगर में कौमी एकता की मिसाल: हजरत बाबा मलंग शाह का 50वां सालाना उर्स धूमधाम से संपन्न, कव्वाली मुकाबले ने बांधा समां

Deshkibaat24
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विशेष रिपोर्ट: रिपोर्टर रिजवान

जशपुर नगर में गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। हर साल की भांति इस वर्ष भी हजरत बाबा मलंग शाह रहमतुल्ला अलेह का 50वां सालाना उर्स बेहद अकीदत और धूमधाम के साथ मनाया गया। यह आयोजन जशपुर नगर में हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा, जहां दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
नई कमेटी के नेतृत्व में सफल आयोजन
उर्स के इस ऐतिहासिक 50वें साल के सफर को यादगार बनाने में उर्स कमेटी के पदाधिकारियों की मुख्य भूमिका रही। इस पूरे भव्य आयोजन को कमेटी के सदर महबूब अंसारी, सेक्रेटरी सरफराज आलम और खजांची हफीज खान के कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। कमेटी के पदाधिकारियों ने उर्स में आने वाले जायरीनों के लिए तमाम पुख्ता इंतजाम किए थे।
मुख्य अतिथियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
सद्भावना और आपसी प्रेम के इस मंच पर शहर की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृष्ण कुमार राय एवं युवराज एस प्रताप सिंह जूदेव शामिल हुए। अतिथियों ने बाबा के दर पर मन्नतें मांगीं और समाज में अमन-चैन व भाईचारा बनाए रखने का संदेश दिया। अतिथियों का स्वागत उर्स कमेटी के सदस्यों द्वारा गर्मजोशी के साथ किया गया।
कव्वाली मुकाबले में गूंजे सूफियाना कलाम
उर्स के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा शानदार कव्वाली का आगाज, जिसने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। इस मौके पर देश के मशहूर कव्वाल गुलाम हबीब पेंटर और जानी-मानी कव्वाला गुलनाज साबरी के बीच एक से बढ़कर एक सूफियाना कलामों का मुकाबला देखने को मिला। दोनों ही फनकारों ने अपनी आवाज और शायरी से शमां बांध दिया, जिस पर उपस्थित जनसमूह झूमने को मजबूर हो गया।
वॉलिंटियर्स की रही अहम भूमिका
इस बड़े आयोजन की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और अनुशासन बनाए रखने में मुख्य वॉलिंटियर इमरान आलम, इम्तियाज अंसारी, नईम फैशन और शकील खान सहित अन्य सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। इन सभी युवाओं ने मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, जिससे कार्यक्रम बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
जशपुर नगर का संदेश: बाबा मलंग शाह का यह 50वां उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकता के सूत्र में पिरोने वाला एक महापर्व साबित हुआ, जिसकी गूंज पूरे क्षेत्र में है।

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