
अंबिकापुर : सरगुजा जिले में पुलिसिंग को तकनीकी रूप से सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में एक दिवसीय विशेष साइबर सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस विभाग के डेटा को सुरक्षित रखना और भविष्य में होने वाले संभावित साइबर हमलों से सिस्टम को बचाना था।
पीएचक्यू के साइबर कमांडो ने संभाला मोर्चा
पुलिस मुख्यालय रायपुर के टेक्निकल ब्रांच से पहुंचे विशेष साइबर कमांडो दिलीप सिंह और रिखम साहू ने प्रशिक्षण की कमान संभाली। प्रशिक्षण के दौरान जिले के विभिन्न थाना और चौकी प्रभारियों सहित सीसीटीएनएस (CCTNS) कार्य में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की बारीकियों से अवगत कराया गया।
इस दौरान न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी गई, बल्कि इकाई के हार्डवेयर, नेटवर्क और अन्य तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा जांच (Cyber Security Audit) भी की गई ताकि सिस्टम की कमियों को दूर किया जा सके।
क्या है ‘साइबर हाईजीन’ और क्यों है जरूरी?
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि जिस तरह हम शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखते हैं, उसी तरह डिजिटल उपकरणों के लिए ‘साइबर हाईजीन’ अनिवार्य है। साइबर कमांडो ने डेटा ब्रीच और रैनसमवेयर जैसे जोखिमों को कम करने के लिए 10 सूत्रीय सुरक्षा मानक साझा किए:
पासवर्ड की मजबूती: हर खाते के लिए अलग और जटिल पासवर्ड का उपयोग।
दोहरी सुरक्षा: महत्वपूर्ण खातों पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय करना।
सॉफ्टवेयर अपडेट: सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए सिस्टम को हमेशा अपडेट रखना।
संदिग्ध लिंक: अज्ञात ईमेल या संदेशों के जरिए होने वाले फिशिंग हमलों से बचाव।
डेटा बैकअप: महत्वपूर्ण फाइलों का नियमित बैकअप लेना ताकि डेटा खोने का खतरा न रहे।
पब्लिक वाई-फाई: सार्वजनिक स्थानों के मुफ्त वाई-फाई पर बैंकिंग लेनदेन से बचना।
एंटीवायरस: सिस्टम में विश्वसनीय सुरक्षा सॉफ्टवेयर का नियमित उपयोग।
ऐप परमिशन: स्मार्टफोन ऐप्स को अनावश्यक एक्सेस न देना।
सोशल मीडिया सतर्कता: निजी जानकारियों को सार्वजनिक करने से बचना।
लॉगआउट प्रक्रिया: कार्य पूर्ण होने के बाद साझा सिस्टम से अनिवार्य रूप से लॉगआउट करना।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
इस विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लों, उप पुलिस अधीक्षक अजाक सुरेश भगत सहित साइबर सेल अंबिकापुर की पूरी टीम उपस्थित रही।
पुलिस विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल विभागीय डेटा सुरक्षित होगा, बल्कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मी साइबर अपराधों की विवेचना करने में भी अधिक सक्षम बनेंगे। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि सभी कर्मचारी साइबर हाईजीन के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करें।

