सूरजपुर : जिले के रामानुजनगर थाना पुलिस ने तिवरागुड़ी-सरनापारा क्षेत्र में बोरी में बंद मिली अज्ञात व्यक्ति की लाश के मामले का महज कुछ ही दिनों के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। यह मामला किसी बाहरी रंजिश का नहीं, बल्कि घरेलू हिंसा से उपजे आक्रोश का निकला, जहां एक बेटे ने ही अपने पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने मुख्य आरोपी बेटे समेत साक्ष्य छुपाने और लाश को ठिकाने लगाने में मदद करने वाले कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
बोरी में बंद मिली थी लाश, सिर पर थे चोट के निशान
घटना की शुरुआत 12 जून 2026 को हुई, जब ग्राम तिवरागुड़ी निवासी सूचक भेजन राम ने रामानुजनगर थाने में सूचना दी कि सरनापारा के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव बोरी में भरकर फेंका गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और मर्ग पंचनामा की कार्रवाई शुरू की।
मृतक की उम्र करीब 30 से 35 वर्ष के बीच थी। उसने हाथ में कड़ा, शरीर पर काला टी-शर्ट और काला लोवर पहना हुआ था। उसके सिर पर किसी धारदार हथियार से वार किए जाने के गहरे निशान थे, जिससे साफ था कि उसकी हत्या कर शव को यहां छुपाने के उद्देश्य से फेंका गया था। पुलिस ने तत्काल अपराध क्रमांक 179/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
सोशल मीडिया से हुई मृतक की पहचान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरजपुर के डीआईजी व एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने अज्ञात मृतक की पहचान और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए कड़े निर्देश जारी किए। रामानुजनगर पुलिस ने शिनाख्त के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। इसके माध्यम से मृतक की पहचान शिवप्रसाद (निवासी ग्राम चिरमी परसापानी, चौकी बचरापोडी, थाना बैकुण्ठपुर, जिला कोरिया) के रूप में हुई। शिनाख्त पुख्ता होते ही पुलिस टीम जांच के लिए मृतक के घर पहुंची।
घर पर मिले खून के धब्बे, पूछताछ में बेटे ने उगला राज
जब पुलिस टीम शिवप्रसाद के घर पहुंची, तो वहां कमरे में जगह-जगह खून के धब्बे दिखाई दिए, जिन्हें साफ करने की कोशिश की गई थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने मृतक के 18 वर्षीय बेटे अमृत लाल को हिरासत में लिया और कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ में अमृत लाल टूट गया और उसने अपने पिता की हत्या की पूरी खौफनाक कहानी बयां कर दी।
अमृत लाल ने बताया कि उसका पिता शिवप्रसाद अक्सर उसकी मां बीरा बाई के साथ मारपीट और गाली-गलौज करता था। 10 जून 2026 को भी शिवप्रसाद अपने भाई देवकुमार और पिता रमेश के साथ बैकुण्ठपुर कोर्ट में पेशी से लौटा था। घर आते ही उसने फिर से बीरा बाई के साथ गंभीर मारपीट की। जब अमृत लाल बकरी चराकर घर लौटा, तो मां ने उसे पिता की प्रताड़ना के बारे में बताया। रोज-रोज के इस विवाद और मां की तकलीफ को देखकर अमृत लाल का गुस्सा फूट पड़ा और उसने अपने ही पिता को रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
नींद में सोते समय लोढ़े और टांगी से किया वार
10 जून की रात करीब 7 बजे शिवप्रसाद अपने कमरे में आया और किसी से फोन पर बात करने के बाद सो गया। अमृत लाल पहले से ही टांगी (कुल्हाड़ी) लेकर तैयार था और पिता के गहरे नींद में जाने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही शिवप्रसाद गहरी नींद में सोया, अमृत लाल ने कमरे में रखे लोढ़े और टांगी से उसके सिर पर ताबड़तोड़ प्रहार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद उसने पिता का मोबाइल बंद किया और उसकी सिम निकालकर अपने पास रख ली।
मां ने मिटाए सबूत, मौसा ने बनाई लाश ठिकाने लगाने की योजना
अगली सुबह (11 जून) अमृत लाल ने अपनी मां बीरा बाई को पूरी घटना की जानकारी दी। पति की मौत के बाद बीरा बाई ने बेटे को बचाने के उद्देश्य से कमरे के फर्श पर बिखरे खून को गोबर से पोत दिया ताकि किसी को शक न हो।
इसके बाद अमृत लाल ने अपने मौसा हरवंश सिंह को फोन कर पूरी बात बताई। हरवंश सिंह ने उसे ढांढस बंधाया और कहा कि वह रात होने पर आएगा और लाश को उनके गांव तिवरागुड़ी के पास एक बड़े बांध में फेंक देंगे, जिससे किसी को पता नहीं चलेगा।
कीचड़ में फंसी बाइक, तो दोस्त को किया शामिल
11 जून की रात को हरवंश सिंह अमृत लाल के घर पहुंचा। चूंकि हरवंश सिंह की गाड़ी खराब थी, इसलिए अमृत लाल ने अपने पड़ोसी से झूठ बोलकर मोटरसाइकिल मांगी। रात के अंधेरे में दोनों ने शिवप्रसाद की लाश को बोरी में भरा, रस्सी से बांधा और मोटरसाइकिल पर लादकर कुड़ेली के रास्ते तिवरागुड़ी के लिए निकल गए।
रास्ते में झरनापारा के पास सड़क पर भारी कीचड़ होने के कारण उनकी मोटरसाइकिल फंस गई। इस बीच अमृत लाल ने अपने दोस्त कौशल सिंह उईके को फोन किया और झूठ बोला कि वे लोग धान का बीज लेकर जा रहे थे और गाड़ी खराब हो गई है। कौशल अपनी मोटरसाइकिल लेकर मौके पर पहुंचा, तो अमृत लाल ने उसे पिता की हत्या और लाश के बारे में सच बता दिया। लाश को ठिकाने लगाने के बदले सहयोग मांगने पर कौशल भी इस अपराध में शामिल होने के लिए तैयार हो गया।
इसके बाद कौशल मोटरसाइकिल चलाने लगा, अमृत लाल बीच में बैठा और उसका मौसा हरवंश सिंह पीछे लाश को पकड़कर बैठ गया। वे तिवरागुड़ी बांध की तरफ बढ़ ही रहे थे कि उन्हें बांध के पास किसी की टॉर्च की रोशनी दिखाई दी। पकड़े जाने के डर से वे घबरा गए और लाश को बांध में फेंकने के बजाय तिवरागुड़ी डांड (सड़क किनारे) ही फेंककर फरार हो गए।
चारों आरोपी गिरफ्तार, हथियार और गाड़ियां जब्त
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त लोढ़ा, टांगी, मृतक का मोबाइल और शव के परिवहन में इस्तेमाल की गईं 3 मोटरसाइकिलें जब्त की हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची:
अमृत लाल (उम्र 18 वर्ष 29 दिन) – मुख्य आरोपी (मृतक का बेटा)
हरवंश सिंह (उम्र 35 वर्ष) – सह-आरोपी (मृतक का साढ़ू / अमृत का मौसा)
कौशल सिंह उईके (उम्र 19 वर्ष) – सह-आरोपी (अमृत का दोस्त)
बीरा बाई (उम्र 37 वर्ष) – साक्ष्य छुपाने की आरोपी (मृतक की पत्नी / अमृत की मां)
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका:
इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन और एसडीओपी प्रेमनगर बेनार्ड कुजूर के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी रामानुजनगर राजेन्द्र साहू, एएसआई बिशुनदेव पैकरा, प्रधान आरक्षक हेमंत सोनवानी, हितेश्वर राजवाडे, आरक्षक दीपक यादव, परदेशी चंद्रा और युवराज यादव की सक्रिय व सराहनीय भूमिका रही।