सक्रियता की मिसाल: सरगुजा पुलिस ने तकनीकी कौशल से चंद घंटों में बस स्टैंड से बरामद किया गुमशुदा नाबालिग, परिजनों में छाई खुशी

Deshkibaat24
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अंबिकापुर :  सरगुजा जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां पुलिस की सजगता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और एक मासूम बच्चा अपने परिवार से दोबारा मिल सका। जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन और साइबर सेल की तकनीकी कार्यकुशलता के संयुक्त प्रयास से नया बस स्टैंड अंबिकापुर से एक गुमशुदा नाबालिग बालक को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। यह पूरी कार्रवाई इतनी तेजी से की गई कि प्रार्थी द्वारा सूचना दिए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर बालक को ढूंढ निकाला गया।
सरगुजा जिला पुलिस ने एक बार फिर संवेदनशीलता और मुस्तैदी का परिचय देते हुए इस लापता नाबालिग बालक को महज कुछ ही घंटों के भीतर सुरक्षित बरामद कर परिजनों को सौंप दिया है, जिसके बाद भावुक परिवार ने पुलिस प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।
अंबिकापुर जाने की बात कहकर निकला था बालक, 5-6 दिनों से था लापता
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, मामला उस समय प्रकाश में आया जब पीड़ित प्रार्थी ने अत्यंत व्याकुलता की स्थिति में साइबर सेल पुलिस टीम के पास पहुंचकर एक मौखिक सूचना साझा की। प्रार्थी ने पुलिस को बताया कि उसका नाबालिग लड़का कुछ दिन पहले घर से यह कहकर निकला था कि वह किसी काम से अंबिकापुर जा रहा है। हालांकि, उसके बाद वह आगामी 5 से 6 दिनों तक वापस घर नहीं लौटा। परिजनों ने अपने स्तर पर सगे-संबंधियों, मित्रों और संभावित ठिकानों पर बालक की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिल सका। हताश होकर आखिरकार परिजनों ने कानून और पुलिस व्यवस्था का दरवाजा खटखटाया। सूचक से प्राप्त इस संवेदनशील जानकारी को बिना किसी विलंब के तत्काल साइबर सेल द्वारा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया।
डीआईजी एवं एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता और नाबालिग की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल (भा.पु.से.) ने घटना का तत्काल स्वतः संज्ञान लिया। उन्होंने नाबालिगों से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए अधीनस्थ अधिकारियों और विशेष रूप से साइबर सेल की टीम को मिशन मोड में काम करने के सख्त निर्देश दिए। राजेश कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट हिदायत दी कि अविलंब तकनीकी और जमीनी संसाधनों का उपयोग कर बालक की अवस्थिति का पता लगाया जाए और उसे सुरक्षित दस्तायाब किया जाए।
साइबर सेल की तकनीकी घेराबंदी और सफल रेस्क्यू
वरिष्ठ अधिकारियों से हरी झंडी मिलते ही प्रभारी साइबर सेल अंबिकापुर के कुशल नेतृत्व में एक विशेष साइबर टीम का गठन किया गया और टीम को तत्काल तलाशी अभियान के लिए रवाना किया गया। साइबर सेल के विशेषज्ञ जवानों ने आधुनिक तकनीकी सहायता, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और उपलब्ध सूचनाओं का गहन विश्लेषण शुरू किया। तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस को यह पुख्ता जानकारी मिली कि बालक इस समय नया बस स्टैंड अंबिकापुर के आसपास मौजूद है।
सूचना प्राप्त होते ही साइबर टीम ने बिना समय गंवाए नया बस स्टैंड क्षेत्र में घेराबंदी की और मुस्तैदी दिखाते हुए महज कुछ ही घंटों के भीतर गुम बालक को सुरक्षित ढूंढ निकाला। बरामदगी के बाद बालक को सुरक्षित रूप से पुलिस कार्यालय लाया गया, जहां उसे ढांढस बंधाया गया और उसकी काउंसलिंग की गई।
परिजनों की आंखें हुईं नम, सरगुजा पुलिस का जताया आभार
कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के पश्चात, साइबर सेल की टीम ने बरामद नाबालिग बालक को उसके माता-पिता और परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पिछले कई दिनों से गहरे मानसिक तनाव और डर के साये में जी रहे परिजनों के चेहरे पर अपने बच्चे को सही-सलामत देखकर सुकून की लहर दौड़ गई और उनकी आंखें नम हो गईं। त्वरित, पारदर्शी और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए की गई इस कार्रवाई के लिए परिजनों ने मुक्त कंठ से सरगुजा पुलिस की सराहना की। परिजनों ने कहा कि यदि पुलिस ने इतनी तत्परता न दिखाई होती, तो उनके बच्चे के साथ कोई भी अप्रिय घटना घट सकती थी। उन्होंने पूरी टीम को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार प्रकट किया।
इस सफल कार्रवाई में शामिल कर्मठ पुलिस टीम:
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने और बालक को चंद घंटों में खोजने में सरगुजा साइबर सेल के निम्नलिखित अधिकारियों एवं जवानों की सक्रिय और सराहनीय भूमिका रही:
अजीत मिश्रा — सहायक उप निरीक्षक एवं प्रभारी साइबर सेल
विकास सिन्हा — प्रधान आरक्षक
अनुज जायसवाल — आरक्षक
वीरेंद्र पैकरा — आरक्षक
मनीष सिंह — आरक्षक
रमेश रजवाड़े — आरक्षक
राहुल केरकेट्टा — आरक्षक

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