
अम्बिकापुर/जशपुर: सरगुजा रेंज साइबर थाना पुलिस ने अंतर्राज्यीय स्तर पर संचालित हो रहे एक अत्यंत शातिर और बड़े साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने झारखंड के देवघर जिले में दबिश देकर 06 पेशेवर अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। यह गिरोह देश भर के भोले-भाले नागरिकों को 5G नेटवर्क अपग्रेडेशन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की फर्जी ‘एपीके’ (.apk) फाइलें भेजकर उनके मोबाइल हैक कर लेता था और पलक झपकते ही बैंक खाते खाली कर देता था। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे देश भर में प्रतिदिन लगभग 2,500 से अधिक लोगों को निशाना बना रहे थे।
पत्थलगांव के पीड़ित से ₹5.53 लाख की ठगी के बाद हरकत में आई पुलिस
पुलिस से प्राप्त विवरण के अनुसार, जशपुर जिले के पत्थलगांव निवासी उमेश खुटे ने 11 सितंबर 2025 को पत्थलगांव थाने में उपस्थित होकर एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि उसके मोबाइल पर अनजान नंबर से 5G सिम अपडेट करने के नाम पर एक संदिग्ध लिंक और निर्देश भेजे गए थे। आरोपियों के झांसे में आकर जैसे ही पीड़ित ने प्रक्रिया का पालन किया, उसके बैंक खाते से ₹5,53,900/- की भारी-भरकम राशि ऑनलाइन उड़ा ली गई। मामले की गंभीरता और तकनीकी जटिलता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा द्वारा इस प्रकरण की अग्रिम और सूक्ष्म विवेचना का जिम्मा तत्काल साइबर रेंज थाना सरगुजा को सौंपने का निर्देश दिया गया।
विशेष पुलिस टीम का गठन और देवघर में छापेमारी
आईजी के कड़े निर्देशों के बाद साइबर रेंज थाना के नोडल अधिकारी और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के मार्गदर्शन में एक विशेष तकनीकी व खोजी पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट्स, मोबाइल लोकेशन और बैंक खातों के ट्रांजैक्शन इतिहास का कड़ाई से विश्लेषण किया, जिससे सुराग सीधे झारखंड के देवघर जिले की ओर मिले। छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष टीम ने तत्काल देवघर के लिए कूच किया और वहां स्थानीय स्तर पर घेराबंदी कर साइबर ठगों के इस पूरे ठिकाने को नेस्तनाबूद कर दिया। मौके से पुलिस ने 06 प्रमुख आरोपियों को धर दबोचा।
सलाखों के पीछे पहुंचे अंतर्राज्यीय मास्टरमाइंड:
संतोष कुमार दास
पप्पू महरा
प्रयाग दास
राजकुमार मण्डल
आर्यन कुमार
नित्यानंद
बरामदगी: आरोपियों की घेराबंदी कर जब तलाशी ली गई, तो उनके कब्जे से अपराध में प्रयुक्त 10 नग आधुनिक मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक, चेकबुक और ₹51,000/- की नगद राशि बरामद की गई है।
मोडस ऑपेरंडी: कैसे काम करता था यह घातक रैकेट?
साइबर रेंज पुलिस द्वारा की गई कड़ाई से पूछताछ में आरोपियों ने ठगी के ऐसे तरीकों का खुलासा किया जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है। आरोपियों ने बताया कि इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना देश के अलग-अलग हिस्सों में कई सब-एजेंटों को कमीशन पर रखा हुआ था। ये एजेंट रोजाना लाखों लोगों को बल्क मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए फर्जी लिंक फॉरवर्ड करते थे। ये ठग मुख्य रूप से इन नामों से फर्जी .apk फाइलें भेजते थे:
पीएम डॉट आवास (PM Awas Scam File)
योजना डॉट एपीके (Yojana.apk)
पीएम डॉट किसान डॉट योजना डॉट एपीके (PM Kisan Yojana)
आरटीओ चालान डॉट एपीके (RTO Challan.apk)
परिवहन डॉट एपीके (Parivahan.apk)
ठगों ने बताया कि जैसे ही कोई व्यक्ति इन सरकारी नामों से मिलती-जुलती .apk फाइलों पर क्लिक करता था, बैकग्राउंड में एक खतरनाक सॉफ्टवेयर पीड़ित के फोन में इंस्टॉल हो जाता था। इसके बाद पीड़ित के मोबाइल फोन का पूरा स्क्रीन और डेटा एक्सेस ठगों के पास चला जाता था। ठग अपने खुद के फोन से पीड़ित के सभी आने-जाने वाले एसएमएस (SMS) और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) को सीधे लाइव देख सकते थे।
e-SIM एक्टिवेट कर बैंक खातों पर पूरा नियंत्रण
इस गिरोह की सबसे खतरनाक कार्यप्रणाली यह थी कि ये हैक किए गए मोबाइल एक्सेस के जरिए पीड़ित के नंबर पर बिना उसकी भनक लगे e-SIM (इलेक्ट्रॉनिक सिम) के लिए आवेदन कर देते थे। जैसे ही मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनी e-SIM एक्टिवेट करती, पीड़ित के पास मौजूद भौतिक सिम कार्ड तुरंत बंद हो जाता था। इसके बाद ठग उस e-SIM को अपने पास मौजूद स्मार्टफोन में एक्टिवेट कर लेते थे। सिम का पूर्ण नियंत्रण हाथ में आते ही वे पीड़ित के यूपीआई (UPI) और नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स को रीसेट कर लेते थे और बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर एटीएम मशीनों के जरिए नकद निकाल लेते थे।
बैंक के सुरक्षा गार्ड की मिलीभगत से ₹29.15 लाख का दूसरा बड़ा कांड
विवेचना के दौरान पुलिस को एक और चौंकाने वाली कड़ी हाथ लगी। पूर्व में जशपुर जिले के ही थाना कांसाबेल में दर्ज अपराध क्रमांक 99/2025 के एक मामले में भी इसी गिरोह के तार जुड़े थे, जहां ₹29,15,000/- की बड़ी ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया था। उस मामले में मधुपुर (जिला देवघर, झारखंड) और पत्थलगांव से 02 आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि एक बैंक के सुरक्षा गार्ड ने ही गद्दारी की थी। सुरक्षा गार्ड ने बैंक में आने वाले एक सीधे-साधे ग्राहक रामनिवास राम (पिता जमल राम) को मदद करने का बहाना बनाया और उसके मोबाइल में चुपके से यही खतरनाक एपीके फाइल डाउनलोड कर दी थी। पुलिस ने उस बैंक गार्ड और उसे एपीके फाइल उपलब्ध कराने वाले मुख्य आरोपी को मधुपुर से गिरफ्तार कर पहले ही न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। इस पूरे गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की पता-तलाश अभी भी जारी है।
कार्रवाई में शामिल जांबाज पुलिस टीम
अंतर्राज्यीय सीमा पर जाकर इस बेहद संवेदनशील और बड़े गिरोह का पर्दाफाश करने में सरगुजा रेंज साइबर थाना के निरीक्षक अश्वनी सिंह, निरीक्षक कलीम खान सहित पूरी तकनीकी टीम और अधीनस्थ पुलिस स्टाफ की भूमिका बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण रही। पुलिस प्रशासन ने टीम की इस बड़ी सफलता पर उनकी सराहना की है।
⚠️ साइबर पुलिस की चेतावनी: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए .apk एक्सटेंशन वाली फाइल को इंस्टॉल न करें। सिम अपग्रेडेशन या सरकारी योजनाओं का लाभ केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत केंद्रों से ही प्राप्त करें।