October 12, 2026
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बलरामपुर-रामानुजगंज : जिले के रामानुजगंज फॉरेस्ट रेंज में हाथियों की आवाजाही से एक बार फिर क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जंगलों में इस समय कुल छह हाथी विचरण कर रहे हैं। ग्रामीणों को किसी भी अप्रिय घटना और खतरे से बचाने के लिए वन विभाग की टीम लगातार मुस्तैद है। विभाग द्वारा गांव-गांव में मुनादी (लाउडस्पीकर से घोषणा) करवाकर लोगों को अलर्ट रहने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है।
कनकपुर और आरागाही के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामानुजगंज वन परिक्षेत्र के कनकपुर और रामपुर के जंगलों में पांच हाथियों का एक दल विचरण कर रहा है। वहीं, आरागाही और नवापारा क्षेत्र के जंगलों में एक अकेला (लोनर) हाथी देखा गया है।
वर्तमान में हाथियों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त मात्रा में भोजन और पानी उपलब्ध हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई बार हाथियों का दल भटककर या भोजन की तलाश में ग्रामीण बस्तियों की ओर रुख कर लेता है। बस्तियों में प्रवेश करने के बाद हाथी उत्पात मचाते हैं, फसलों को रौंदते हैं और ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुँचाते हैं।
दो घरों और राइस मिल को पहुँचा नुकसान
हाथियों द्वारा पहुँचाए गए नुकसान और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए रामानुजगंज रेंजर दिलरुबा बानो ने बताया कि क्षेत्र में कुल छह हाथी मौजूद हैं। इनमें तीन मादा हाथी, एक नर हाथी, एक नन्हा शावक और एक लोनर (अकेला) हाथी शामिल है।
लोनर हाथी फिलहाल आरागाही के जंगलों की तरफ विचरण कर रहा है। रेंजर ने बताया कि इन हाथियों ने अब तक ग्रामीणों के दो कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया है और एक राइस मिल को भी नुकसान पहुँचाया है। नुकसान के आकलन के साथ ही सुरक्षा उपाय कड़े कर दिए गए हैं।
कन्हर नदी का रास्ता बना हाथियों का कॉरिडो
रामानुजगंज वन परिक्षेत्र एक सीमावर्ती इलाका है, जो पड़ोसी राज्य झारखंड की सीमा से सटा हुआ है। यहाँ पूरे वर्ष झारखंड की ओर से कन्हर नदी के रास्ते हाथियों के दलों का आवागमन बना रहता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में अक्सर इंसानों और वन्यजीवों (हाथियों) के बीच संघर्ष की स्थितियां उत्पन्न होती रहती हैं।
वन विभाग की निगरानी और मुनादी अभियान
मानव-हाथी संघर्ष को रोकने और जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए वन विभाग की टीम दिन-रात जंगलों में गश्त और निगरानी कर रही है।
विशेष रूप से हाथी प्रभावित क्षेत्रों जैसे कनकपुर, रामपुर, आरागाही और नवापारा में रोजाना मुनादी कराई जा रही है। मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को चेतावनी दी जा रही है कि वे शाम ढलने के बाद जंगलों की ओर न जाएं, हाथियों को देखने या छेड़ने की कोशिश न करें और किसी भी स्थिति में उनसे सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों को जागरूक करके ही इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।

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