सूरजपुर : यदि मन में कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, आगे बढ़ने का अटूट संकल्प हो और उसे जिला प्रशासन का संवेदनशील सहयोग मिल जाए, तो जीवन की कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक और सकारात्मक कहानी छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आई है। यहाँ के ग्राम रनियाडीह के निवासी एक दिव्यांग छात्र कोमल राजवाड़े के हौसलों को जिला प्रशासन की त्वरित और संवेदनशील पहल से एक नई उड़ान मिली है। कोमल राजवाड़े, जिनके पिता का नाम श्यामलाल राजवाड़े है, को समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से एक आधुनिक मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई गई है।
असहनीय दर्द और पढ़ाई में रुकावट से जूझ रहा था छात्र
कोमल राजवाड़े जन्म से ही शारीरिक रूप से अत्यंत गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वे अपने दोनों हाथों और दोनों पैरों से पूरी तरह दिव्यांग हैं। इस कठिन शारीरिक स्थिति के कारण उनका दैनिक जीवन संघर्षों से भरा रहा है। विशेष रूप से शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें प्रतिदिन अपने घर से विद्यालय आने-जाने में भारी दिक्कतों और असहनीय शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता था।
इससे पहले उन्हें शासन की ओर से एक सामान्य मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान की गई थी, परंतु उनके दोनों हाथों की दिव्यांगता के कारण उस पुरानी गाड़ी का संचालन करना उनके लिए बिल्कुल भी सुगम नहीं था। दोनों हाथों से अक्षम होने के कारण जब लंबे समय तक वे पुरानी ट्राईसाइकिल का हैंडल थामते थे, तो उनके हाथों में गंभीर और असहनीय दर्द होने लगता था। इसके परिणामस्वरूप, समय पर घर से निकलने के बावजूद वे अक्सर विद्यालय देर से पहुंचते थे, जिससे उनकी नियमित पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही थी।
कलेक्टर जनदर्शन में त्वरित न्याय
शिक्षा के प्रति अटूट लगाव और अपनी परिस्थितियों से न हार मानने के जज्बे के साथ, कोमल ने अपनी इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक ठोस कदम उठाया। उन्होंने सीधे जिला मुख्यालय पहुंचकर आयोजित होने वाले ‘कलेक्टर जनदर्शन’ कार्यक्रम में सूरजपुर की कलेक्टर रेना जमील के समक्ष अपनी व्यथा रखी और एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। जनदर्शन में जब यह मामला कलेक्टर के सामने आया, तो उन्होंने छात्र की गंभीर शारीरिक स्थिति और पढ़ाई के प्रति उसकी लगन को देखते हुए मामले को अत्यंत संवेदनशीलता से लिया।
कलेक्टर रेना जमील ने इस मानवीय और संवेदनशील विषय पर बिना किसी विलंब के समाज कल्याण विभाग को तत्काल आवश्यक पहल सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए। कलेक्टर के इन निर्देशों के अनुरूप, समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक आलोक भवाल ने तत्परता दिखाते हुए कागजी औपचारिकताओं को दरकिनार किया और त्वरित कार्रवाई शुरू की। विभाग द्वारा बेहद कम समय के भीतर छात्र की शारीरिक आवश्यकताओं के अनुकूल आधुनिक सुविधाओं से लैस मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई।
प्रशासन ने बढ़ाया हौसला, छात्र ने जताया आभार
इसके पश्चात, स्वयं कलेक्टर रेना जमील ने अपने हाथों से इस विशेष मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की चाबी कोमल राजवाड़े को सौंपी। इस भावुक और प्रेरणादायी क्षण के दौरान कलेक्टर ने कोमल से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने छात्र का ढांढस बंधाया और उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी। कलेक्टर ने कोमल को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी इस शारीरिक दिव्यांगता को अपनी सफलता की राह में कभी भी बाधा न बनने दें और मन लगाकर अपनी पढ़ाई पूरी करें, क्योंकि शिक्षा ही उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी।
नई तकनीक और सुगम संचालन वाली मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने के बाद छात्र कोमल राजवाड़े के चेहरे पर एक अनूठी मुस्कान और संतोष देखा गया। उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनके लिए विद्यालय तक का सफर तय करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा। इसके कारण अब वे बिना किसी शारीरिक दर्द या देरी के समय पर स्कूल पहुंच सकेंगे और अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर केंद्रित कर पाएंगे। इस संवेदनशील और जीवन बदलने वाले सहयोग के लिए कोमल राजवाड़े और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा सूरजपुर जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार प्रकट किया है।