सूरजपुर : प्रतापपुर शासन प्रशासन भले ही सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही के बड़े-बेड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। जनपद पंचायत प्रतापपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ खुद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सह प्रथम अपीलीय अधिकारी के कड़े आदेश को भी हवा में उड़ा दिया गया। आदेश पारित होने के 10 दिवस से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार ग्राम पंचायत द्वारा न तो चाही गई जानकारी उपलब्ध कराई गई है और न ही इस संबंध में कोई औपचारिक पत्राचार करने की जहमत उठाई गई है।
लापरवाही का पूरा घटनाक्रम
मामला ग्राम पंचायत दरहोरा का है, जहाँ एक सजग नागरिक द्वारा 15वें वित्त आयोग मद के तहत स्वीकृत कार्य योजना प्रस्ताव, तकनीकी व प्रशासकीय स्वीकृति, कार्य आदेश, मूल्यांकन, भौतिक सत्यापन प्रतिवेदन और भुगतान संबंधी बैंक स्टेटमेंट व वाउचरों की सत्यापित कॉपियां मांगी गई थीं।
तय समय सीमा के भीतर जनसूचना अधिकारी द्वारा जानकारी न दिए जाने पर मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष पहुंचा था। सुनवाई के दौरान उच्च कार्यालय ने माना कि जनसूचना अधिकारी अपने दायित्वों के प्रति गंभीर नहीं हैं और उन्होंने आरटीआई कानून की समय सीमा का स्पष्ट उल्लंघन किया है।
10 दिन की मिली थी मोहलत, आदेश ताक पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 10 जून 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम पंचायत दरहोरा के सचिव एवं जनसूचना अधिकारी को स्पष्ट आदेश जारी किया था। आदेश के तहत 10 दिवस के भीतर आवेदक को मांगी गई समस्त जानकारियां ‘निशुल्क’ उपलब्ध कराकर उसकी पावती कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि इस मियाद को गुजरे कई दिन बीत चुके हैं, पर फाइलें टस से मस नहीं हुईं।
पत्राचार तक नहीं: व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि संबंधित ग्राम पंचायत ने आदेश मिलने के बाद किसी भी प्रकार का पत्राचार या संवाद करना तक जरूरी नहीं समझा। पीड़ित पक्ष का कहना है:
“उच्च अधिकारी के स्पष्ट और कड़े आदेश के बावजूद निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा इस तरह की उदासीनता दिखाना यह साबित करता है कि इन्हें कानून और अपने वरिष्ठों के आदेश का कोई डर नहीं है। 10 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन विभाग की ओर से पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है।”
अब राज्य सूचना आयोग का खटखटाया जाएगा दरवाजा
प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की सरेआम अवहेलना होने के बाद अब इस मामले को राज्य सूचना आयोग, नवा रायपुर के समक्ष ले जाने की तैयारी की जा रही है। सजग नागरिकों का कहना है कि जब तक आदेश का पालन न करने वाले लापरवाह जनसूचना अधिकारियों पर भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आरटीआई कानून का इसी तरह मखौल उड़ता रहेगा। अब देखना यह है कि इस खुली अवहेलना पर जनपद के उच्च अधिकारी क्या कड़ा एक्शन लेते हैं।