सूरजपुर जिले को मिले ₹29.15 करोड़, 518 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सीधा लाभ

Deshkibaat24
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सूरजपुर :  प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों तक पानी की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग ने एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने अपरीक्षित नवीन मद के तहत विभिन्न सिंचाई योजनाओं से जुड़े 36 प्रमुख कार्यों के लिए कुल 146 करोड़ 43 लाख 95 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की है।
इस निर्णय के तहत सूरजपुर जिले के बुनियादी सिंचाई ढांचे को नया जीवन मिलने जा रहा है। सूरजपुर जिले में विभिन्न जलाशयों के जीर्णोद्धार, मरम्मत और एनीकट निर्माण के लिए 29 करोड़ 15 लाख 34 हजार रुपये की राशि पृथक से स्वीकृत की गई है। इन योजनाओं के पूरा होने से जिले के सैकड़ों किसानों को समय पर सिंचाई का जल मिल सकेगा।
सूरजपुर जिले में स्वीकृत योजनाओं और सिंचित क्षेत्र का विवरण
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी स्वीकृति पत्र के अनुसार, सूरजपुर जिले की 7 प्रमुख योजनाओं का नवीनीकरण और निर्माण कराया जाएगा। इससे कुल 518 हेक्टेयर नए और मौजूदा कृषि क्षेत्र में निर्बाध जल आपूर्ति हो सकेगी:
कल्याणपुर जलाशय योजना: इस जलाशय के नवीनीकरण कार्य के लिए ₹3,89,48,000 की मंजूरी दी गई है। कार्य पूर्ण होने पर 86 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा।
बद्रिकाश्रम जलाशय योजना: इसके नवीनीकरण हेतु ₹4,43,38,000 स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 29 हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी मिलेगा।
पसला जलाशय योजना: इस योजना के जीर्णोद्धार के लिए ₹4,06,22,000 आवंटित किए गए हैं। इससे 76 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।
जामडीह जलाशय योजना: इसके नवीनीकरण कार्य के लिए ₹3,23,45,000 की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना से 61 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।
गंगोटी जलाशय योजना: इस बड़ी योजना के लिए ₹4,72,18,000 मंजूर किए गए हैं, जिससे सर्वाधिक 96 हेक्टेयर क्षेत्र को सीधा फायदा पहुंचेगा।
डांडकरवां एनीकट योजना: जल स्तर बनाए रखने और त्वरित सिंचाई के लिए एनीकट निर्माण हेतु ₹4,09,75,000 स्वीकृत किए गए हैं। इससे 70 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
मायापुर-2 जलाशय योजना: इस योजना के तहत कार्य पूर्ण करने हेतु ₹4,70,88,000 की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है, जिससे 100 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी पहुंचेगा।
किसानों की बढ़ेगी आत्मनिर्भरता
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन जलाशयों के नवीनीकरण से न केवल नहरों की गाद और लीकेज की समस्या खत्म होगी, बल्कि अंतिम छोर (टेल एरिया) तक पानी पहुंचेगा। मानसून के पानी का सही संचयन होने से रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान किसानों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर निर्माण और जीर्णोद्धार का काम शुरू कराने की तैयारी में है।

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