सूरजपुर : जिले में पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को तराशने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की पहल पर ‘रैम्प योजना’ के तहत एक दिवसीय विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। हीरा लाल साधु राम सेवा कुंज में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा ने छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर की।
इस अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, वन विभाग, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, जिला उद्योग संघ और जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े युवाओं, उद्यमियों और कंटेंट क्रिएटर्स ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
सूरजपुर टूरिज्म के नए ‘लोगो’ का अनावरण
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा आधिकारिक ‘सूरजपुर टूरिज्म लोगो’ का अनावरण किया गया। यह लोगो जिले की समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की विविध संभावनाओं को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य सूरजपुर के पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग करना और उन्हें देश-दुनिया के पर्यटकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।
पर्यटन विकास और डिजिटल ब्रांडिंग पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा ने कहा कि सूरजपुर में पर्यटन की अपार क्षमता है और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। उन्होंने कहा:
किसी भी पर्यटन स्थल को सफल बनाने के लिए पर्यटकों को सही जानकारी के साथ-साथ सुगम आवागमन, ठहरने और खान-पान की बेहतर सुविधाएं मिलना आवश्यक है।
वर्तमान दौर में सोशल मीडिया पर्यटन को बढ़ावा देने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसके जरिए जिले के प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रचारित किया जाना चाहिए।
स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, परिवहन और गाइड सेवाओं को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है।
केनापारा की तर्ज पर भटगांव क्षेत्र को भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने और एक एकीकृत ‘टूरिज्म सर्किट’ बनाने की जरूरत है।
रूरल इकोनॉमी और माइनिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना
कलेक्टर रेना जमील ने सेमिनार में पर्यटन को आर्थिक विकास का मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल मनोरंजन तक सीमित न होकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का एक बड़ा जरिया है।
सूरजपुर में माइनिंग टूरिज्म के साथ-साथ प्राकृतिक, धार्मिक और ग्रामीण पर्यटन की विशाल संभावनाएं मौजूद हैं।
केनापारा में खनन क्षेत्र को पुनर्जीवित (रिक्लेम) करके जिस तरह पर्यटन स्थल के रूप में ढाला गया है, उससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिली है।
जिले की बेहतर रेल और सड़क कनेक्टिविटी पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत आधार है। उपलब्ध स्थलों को व्यवस्थित कर स्थानीय संस्कृति और उत्पादों को पर्यटन से जोड़ा जाएगा।
सेमिनार में राज्य स्तर से पहुंचे विशेषज्ञों और अतिथियों ने ईको-एथनिक तथा सस्टेनेबल टूरिज्म की आधुनिक अवधारणाओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।
दो दिवसीय पर्यटन यात्रा को हरी झंडी
सेमिनार के समापन के बाद अतिथियों ने दो दिवसीय पर्यटन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस यात्रा के दौरान प्रतिभागी जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर वहां की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विशेषताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे और पर्यटन आधारित स्वरोजगार की संभावनाओं को समझेंगे। कलेक्टर रेना जमील की यह पहल जिले की पर्यटन क्षमता को नई पहचान देने और स्थानीय उद्यमिता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
सूरजपुर में पर्यटन विस्तार और स्वरोजगार पर मंथन: जिला प्रशासन की पहल पर ‘रैम्प योजना’ के तहत एक दिवसीय सेमिनार आयोजित
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