विशेष संवादाता रिजवान खान
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जिगनियां से फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक मृत व्यक्ति को 13 सालों तक सरकारी अभिलेखों में जीवित दर्शाकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन का फौती नामांतरण अपने नाम करा लेने का आरोप लगा है। इस पूरे प्रकरण की शिकायत ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुसमी को ज्ञापन सौंपकर की है, जिसके बाद से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
13 साल तक अभिलेखों में दर्ज रहा नाम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला कुसमी अनुभाग के ग्राम जिगनियां स्थित पारा अम्बाकोना का है। ग्रामीणों द्वारा SDM को दिए गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अम्बाकोना में स्थित शामिल खाता में लोया आ० चकिया का नाम दर्ज था। लोया का निधन वर्ष 2012 में ही हो गया था, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2025 तक राजस्व अभिलेखों में जमीन लोया के नाम पर ही दर्ज चलती रही।
फर्जी आधार और मृत्यु प्रमाण पत्र से नामांतरण का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम जलबोथा निवासी गोवर्धन पिता लेडग ने लोया के निधन का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और अपना कूटरचित आधार कार्ड तैयार कराया। इसके बाद वास्तविक वारिसदार को बिना कोई सूचना दिए या इश्तार जारी कराए, फर्जी तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया।
2003 की मतदाता सूची से सामने आया विरोधाभास
ग्रामीणों ने शिकायत पत्र में स्पष्ट किया है कि लोया का कोई पुत्र नहीं था, बल्कि केवल एक पुत्री है जिसका विवाह गोपातु से हुआ है और वह वर्तमान में जीवित है। इसके अलावा वर्ष 2003 की मतदाता सूची का हवाला देते हुए बताया गया कि गोवर्धन के पिता, पत्नी और भाई सभी के रिकॉर्ड में पिता का नाम लेढ़गा दर्ज है। इसके बावजूद गोवर्धन ने खुद को फर्जी तरीके से पुत्र दर्शाकर जमीन अपने नाम स्थानांतरित करा ली।
भू-अभियापियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि बिना मैदानी राजस्व कर्मचारियों और भू-अभियापियों की मिलीभगत के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर नामांतरण पंजी में नाम चढ़ाया गया है।
कार्रवाई और नाम विलोपन की मांग
ग्रामीणों ने SDM कुसमी से मांग की है कि मामले की सत्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी व्यक्तियों तथा इसमें शामिल कर्मचारियों पर कूटरचना और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, राजस्व रिकॉर्ड से गोवर्धन पिता लेढ़ग का नाम तत्काल विलोपित कर वास्तविक कानूनी वारिस को न्याय दिलाया जाए।