सूरजपुर : जिला जेल सूरजपुर में बंदियों के पुनर्वास, मानसिक रूपांतरण और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाया गया है। सेंट्रल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सूरजपुर के तत्वावधान में आयोजित 13 दिवसीय सघन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 35 बंदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जेल परिसर के भीतर ही आत्मनिर्भरता का नया अध्याय शुरू करते हुए अगरबत्ती, साबुन तथा हैंडवॉश निर्माण का व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
सुधारात्मक दृष्टिकोण और विस्तृत प्रशिक्षण
यह संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला जेल अधीक्षक विक्रम गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन, दूरदर्शिता एवं सक्रिय सहयोग से आयोजित किया गया। सुधारात्मक दृष्टिकोण को अपनाते हुए यह विशेष सत्र 2 जुलाई से 13 जुलाई 2026 तक निरंतर संचालित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य एजेंडा न केवल बंदियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था, बल्कि उन्हें कम से कम लागत में अपना स्वयं का स्वरोजगार स्थापित करने के गुर सिखाना भी था। 13 दिनों की इस प्रशिक्षण अवधि में बंदियों को उत्पाद निर्माण की बारीकियों के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी कंट्रोल), आकर्षक पैकेजिंग, व्यावहारिक विपणन (मार्केटिंग रणनीतियां) तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं से संबंधित आवश्यक कानूनी व तकनीकी जानकारियां विस्तार से प्रदान की गईं।
उद्यमिता विकास और वित्तीय साक्षरता पर विशेष जोर
प्रशिक्षण सत्र को प्रभावी बनाने में आरसेटी सूरजपुर के निदेशक अशोक कुमार राणा, समर्पित फैकल्टी परमानंद एवं मयंक तिवारी, तथा कुशल प्रशिक्षक भगवंती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन विशेषज्ञों ने बंदियों को केवल निर्माण प्रक्रिया तक सीमित न रखकर, उनके भीतर उद्यमिता विकास (इंटरप्रेन्योरशिप) की भावना जागृत की। सत्रों के दौरान बंदियों को वित्तीय साक्षरता का पाठ पढ़ाया गया, जिसमें बजट प्रबंधन, बचत के लाभ और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी व स्वरोजगार योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि रिहाई के बाद वे इन योजनाओं का सीधा लाभ उठाकर समाज में एक सम्मानित जीवन जी सकें।
कड़ा मूल्यांकन और प्रमाण-पत्रों का वितरण
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस यानी 13 जुलाई को सभी 35 सहभागी बंदियों की योग्यता और सीख का निष्पक्ष मूल्यांकन किया गया। इसके लिए ईडीपी (उद्यमिता विकास कार्यक्रम) एवं डोमेन असेसर द्वारा एक विशेष लिखित और प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षा आयोजित की गई। बंदियों ने मूल्यांकन के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह साबित किया कि वे सुधार और विकास के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मूल्यांकन के इस महत्वपूर्ण अवसर पर आरसेटी के निदेशक अशोक कुमार राणा, फैकल्टी मयंक तिवारी एवं डीएसटी भगवंती मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने बंदियों के हुनर को सराहा। परीक्षा के उपरांत सभी सफल प्रतिभागियों को विधिवत प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
जेल प्रशासन का वक्तव्य
इस अवसर पर जिला जेल अधीक्षक विक्रम गुप्ता ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि, “इस प्रकार के कौशल विकास और सुधारात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बेहद जरूरी हैं। यह प्रयास उन्हें जेल की चारदीवारी से बाहर निकलने के बाद अपराध की दुनिया से दूर, एक आत्मनिर्भर, मर्यादित और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा। जेल प्रशासन ऐसे रचनात्मक प्रयासों के लिए हमेशा तत्पर है।” उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए आरसेटी की पूरी टीम की सराहना की।
भविष्य का रोडमैप: दो वर्षों तक निरंतर सहयोग और बैंक लिंकेज
आरसेटी के निदेशक अशोक कुमार राणा ने इस पहल के दीर्घकालिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करना नहीं है, बल्कि बंदियों की वास्तविक मदद तब शुरू होगी जब वे जेल से रिहा होंगे। आरसेटी ऐसे सभी प्रशिक्षित बंदियों को रिहाई के बाद मुख्यधारा में स्थापित करने के लिए वित्तीय संस्थाओं से जोड़ते हुए बैंक लिंकेज और आसान ऋण सुविधा (लोन सपोर्ट) उपलब्ध कराएगा।
इसके साथ ही, अगले दो वर्षों तक संस्थान द्वारा इन पूर्व-बंदियों को ‘हैंडहोल्डिंग सहायता’ (निरंतर मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहायता) प्रदान की जाएगी ताकि उनका व्यवसाय सुचारू रूप से चल सके। राणा ने आर्थिक विश्लेषण साझा करते हुए बताया कि अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश निर्माण जैसे कुटीर उद्योगों के माध्यम से कोई भी कुशल व्यक्ति बहुत कम पूंजी लगाकर स्थानीय बाजार में अपने उत्पाद बेच सकता है और हर महीने आसानी से 15 से 20 हजार रुपये तक की सम्मानजनक आय अर्जित कर सकता है।
आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ते कदम
कार्यक्रम के समापन समारोह में जेल प्रशासन के अधिकारियों और आरसेटी की पूरी टीम ने सभी प्रशिक्षित बंदियों के उज्ज्वल, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की कामना की। इस विदाई संदेश ने बंदियों के भीतर एक नया आत्मविश्वास और समाज में सम्मानजनक वापसी की एक नई उम्मीद जगाई है।
जिला जेल सूरजपुर में बंदियों का कौशल प्रशिक्षण संपन्न: 35 बंदियों ने सीखा अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश निर्माण, मुख्यधारा से जुड़ने की अनूठी पहल
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