सूरजपुर : पल्स पोलियो अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने और कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रहे, इस उद्देश्य को लेकर सूरजपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है। अभियान को गति देने के लिए जिला टीकाकरण अधिकारी ने स्वयं स्वास्थ्य विभाग की जमीनी टीम के साथ मोर्चा संभाला। उन्होंने क्षेत्र का सघन भ्रमण किया और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को अपने हाथों से “दो बूंद जिंदगी की” पिलाई। इस दौरान उन्होंने फील्ड पर काम कर रही विभिन्न टीमों के कार्यों का औचक निरीक्षण भी किया और अभियान की जमीनी प्रगति का जायजा लिया।
सामूहिक जिम्मेदारी और निरंतरता पर जोर
क्षेत्र भ्रमण के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी ने पालकों और अभिभावकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि पांच वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक दिलाना हर परिवार की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि:
“भारत को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि हर बार अभियान के दौरान प्रत्येक बच्चे को पोलियो की खुराक मिले। हर एक बच्चे तक दवा पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
कार्यप्रणाली का निरीक्षण और मार्किंग की जांच
निरीक्षण के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी ने केवल दवा पिलाने तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि टीमों द्वारा घरों पर किए जा रहे चिन्हांकन (मार्किंग) का भी बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए कि पल्स पोलियो अभियान के निर्धारित दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी घर या बच्चा छूट न पाए।
टीकाकरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
घर-घर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने केवल पोलियो की दवा ही नहीं पिलाई, बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा की दिशा में भी काम किया। टीमों ने अभिभावकों को नियमित टीकाकरण (Routine Immunization) के महत्व को समझाया और बताया कि बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए समय पर सभी टीके लगवाना कितना आवश्यक है।
जिला प्रशासन की आम जनता से अपील
अभियान के अंत में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से आम जनता से एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी भी अपरिहार्य कारणवश या प्रवास की वजह से कोई बच्चा पल्स पोलियो की इस खुराक से वंचित रह गया हो, तो अभिभावक तुरंत सक्रियता दिखाएं। ऐसे बच्चे के माता-पिता बिना किसी देरी के अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, एएनएम या मितानीन/स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलवाएं, ताकि जिले का कोई भी बच्चा इस सुरक्षा चक्र से बाहर न रहे।