अम्बिकापुर : सरगुजा जिले में साइबर अपराधियों और अवैध बैंकिंग नेटवर्क के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश अग्रवाल के सख्त दिशा-निर्देशों के बाद थाना कोतवाली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी में लिप्त एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में सीधे तौर पर संलिप्त दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय (तकनीकी सेवाएँ) नवा रायपुर द्वारा जारी विशेष गाइडलाइंस के तहत की गई है, जिसमें देश भर में फैले ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts), फर्जी पीओएस (POS) मशीनों और फर्जी सिम धारकों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने को कहा गया था।
चार राज्यों में फैला था ठगी का जाल
पुलिस से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, साइबर पोर्टल के जरिए लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि देश के अलग-अलग राज्यों से आम नागरिकों को ठग कर करोड़ों रुपये इधर से उधर ट्रांसफर किए जा रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की सघन जांच के दौरान सरगुजा पुलिस के हाथ कुछ ऐसे बैंक खातों के सुराग लगे, जिनका इस्तेमाल केवल अवैध पैसों के लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया जा रहा था। इन्हें तकनीकी भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है, जिसमें दूसरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इंडियन बैंक के खाता संख्या 7844758099 और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाता संख्या 60504614490 के खिलाफ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे अलग-अलग राज्यों के साइबर पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायतें दर्ज हैं। प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, इन दोनों खातों में ऑनलाइन माध्यम से कुल ₹2,04,200/- की अवैध राशि प्राप्त होना प्रमाणित पाया गया है।
पान ठेले से संचालित हो रहा था काला खेल
थाना कोतवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सूरज कुमार (पिता: राजू कश्यप), निवासी मकान नंबर 03, मंगल पाण्डेय वार्ड, पेट्रोल पंप के पास, नमनाकलॉ अम्बिकापुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध क्रमांक 374/2026 (धारा 318(4), 317(4) और 3(5) बीएनएस) पंजीकृत कर जांच को आगे बढ़ाया।
विवेचना के दौरान पुलिस की विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य खाताधारक सूरज कुमार और उसके साथी धीरज सिंह (पिता: स्वर्गीय दिलीप सिंह, उम्र 34 वर्ष), निवासी फुण्डूरडिहारी, बीचपारा, थाना गांधीनगर (जिला सरगुजा) को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जब सूरज कुमार को उसके नाम पर संचालित दोनों बैंक खातों के पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड पेश करने का कानूनी नोटिस जारी किया, तब इस पूरे नेक्सस का चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
पूछताछ और लिखित बयान में सूरज कुमार ने स्वीकार किया कि उसने पैसों के लालच में आकर अपने दोनों बैंक खातों के पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड अपने साथी धीरज सिंह को सौंप दिए थे, जो क्षेत्र में एक पान का ठेला संचालित करता है। धीरज सिंह को जब पुलिस ने नोटिस देकर तलब किया, तो उसने कुबूल किया कि सूरज कुमार से प्राप्त ये सभी महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज उसने आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा नामक व्यक्ति को दे दिए थे। जांच में स्पष्ट हुआ है कि इस पूरे ठगी नेटवर्क का मुख्य उपयोग आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा ही कर रहा था और ठगी की पूरी रकम उसी के पास रोटेट हो रही थी।
आरोपियों का विवरण और पुलिस टीम की भूमिका
अपराध के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों सूरज कुमार और धीरज सिंह को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा (जेल) भेज दिया गया है। पुलिस अब मुख्य आरोपी आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
इस पूरी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने में थाना कोतवाली के निम्नलिखित पुलिस अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रही:
शशिकांत सिन्हा (थाना प्रभारी / निरीक्षक)
राजेन्द्र सिंह (उपनिरीक्षक)
सियाराम मरावी (प्रधान आरक्षक)
लालबाबू सिंह (आरक्षक)
संतोष पटेल (सैनिक)
पुलिस की आम जनता से अपील:
सरगुजा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति या अधिक लाभ के झांसे में आकर अपने नाम पर बैंक खाता न खुलवाएं और न ही अपने एटीएम, पासबुक या चेकबुक किसी को किराए पर दें। ऐसा करना कानूनन अपराध है और अनजाने में आप किसी बड़े अंतर्राज्जीय अपराध का हिस्सा बन सकते हैं।

