
बलरामपुर /कुसमी : देश की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र ‘गौवंश’ के संरक्षण को लेकर कुसमी अंचल से एक बड़ी और प्रभावी पहल सामने आई है। रजा यूनिटी फाउंडेशन (छत्तीसगढ़) के नेतृत्व में समाज के विभिन्न वर्गों के जागरूक नागरिकों ने एकजुट होकर गाय को राष्ट्रीय पशु और छत्तीसगढ़ में राजकीय पशु का दर्जा देने की बुलंद माँग की है। इस संबंध में देश की महामहिम राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कुसमी के माध्यम से प्रेषित किया गया है।
आस्था, अर्थव्यवस्था और सह-अस्तित्व का प्रतीक है गौवंश
कुसमी में सौंपे गए इस ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि भारत की सनातन सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में गौवंश का योगदान अतुलनीय रहा है। भारतीय समाज में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, करुणा और सह-अस्तित्व का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। करोड़ों नागरिकों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं इससे गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में गौवंश को संवैधानिक और राजकीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान मिलना समय की माँग है।
आवारा पशुओं की समस्या और तस्करी पर गहरी चिंता
ज्ञापनकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर गौवंश की दुर्दशा और उससे उत्पन्न हो रही सामाजिक समस्याओं की ओर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया:
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ: सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर आवारा घूम रहे गौवंश के कारण आए दिन गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं। इन दुर्घटनाओं में न केवल बेकसूर इंसानों की जान जा रही है, बल्कि मूक पशु भी असमय काल के गाल में समा रहे हैं।
तस्करी और अवैध वध पर रोक: ज्ञापन में गौवंश के अवैध परिवहन, अंतर्राज्यीय तस्करी और अवैध वध की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इन पर पूरी तरह से प्रभावी रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
“गौ-संरक्षण के नाम पर न हो किसी निर्दोष को परेशानी” – निष्पक्षता की माँग
इस ज्ञापन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू कानून व्यवस्था को लेकर था। रजा यूनिटी फाउंडेशन और कुसमी के प्रबुद्ध नागरिकों ने स्पष्ट रूप से माँग की है कि:
“गौ-संरक्षण और सुरक्षा की आड़ में किसी भी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध बिना पर्याप्त साक्ष्य और निष्पक्ष जाँच के कोई भी दंडात्मक या दमनकारी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। समाज में सौहार्द बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि कानून के दायरे में रहते हुए केवल और केवल वास्तविक दोषियों के खिलाफ ही कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।”
स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति की आवश्यकता
ज्ञापन के अंत में राज्य और केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि वे आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ‘गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन नीति’ को और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाएँ। आधुनिक गौशालाओं का निर्माण, उनके चारे-पानी की उचित व्यवस्था और सड़कों से पशुओं को सुरक्षित हटाने के लिए एक दीर्घकालिक और ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
कुसमी एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान रजा यूनिटी फाउंडेशन के पदाधिकारियों सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, समाज सेवी और विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कुसमी से उठी इस साझा पहल की पूरे जिले में सराहना की जा रही है।