अंबिकापुर : सरगुजा पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय साइबर ठगों के एक बड़े नेटवर्क पर कड़ा प्रहार करते हुए ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी बैंक खातों) के जरिए धोखाधड़ी करने वाले तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से पकड़ा गया है। आरोपियों ने सरगुजा की एक शिक्षिका को इंटरनेट ब्राउज़र पर अश्लील सामग्री देखने का फर्जी डर दिखाया और खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर कुल 4,50,000 रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया था।
पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक के सख्त दिशा-निर्देशों के तहत जिले में लंबित और गंभीर साइबर अपराधों के निकाल हेतु धरपकड़ का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में थाना गांधीनगर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मध्य प्रदेश में दबिश देकर इस गिरोह को दबोचने में सफलता पाई है। पकड़े गए तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
डिजिटल अरेस्ट और ब्लैकमेलिंग की पूरी कहानी
प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब गांधीनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत अजिरमा की निवासी मंजूलिना किस्पोट्टा (पति नवल किस्पोट्टा) ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि 19 मार्च 2026 को जब वह स्कूल ड्यूटी खत्म कर अपने घर लौटीं, तो उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर 919232064586 से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने निहायत ही पेशेवर लहजे में बात करते हुए खुद को ‘क्राइम ब्रांच’ का वरिष्ठ अधिकारी बताया।
अज्ञात कॉलर ने पीड़िता पर मानसिक दबाव बनाते हुए कहा कि आपके द्वारा गूगल ब्राउज़र पर अश्लील फोटो और वीडियो देखे गए हैं, जो कि कानूनन गंभीर व दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ठग ने कानूनी कार्रवाई और सामाजिक बदनामी का भय दिखाते हुए कहा कि यदि वे तुरंत समझौता नहीं करती हैं, तो पुलिस टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए रवाना हो जाएगी। इस अचानक आए फोन और गिरफ्तारी के डर से पीड़िता पूरी तरह घबरा गईं। इसका फायदा उठाकर आरोपी ने अलग-अलग तिथियों में झांसा देकर विभिन्न फोन-पे (PhonePe) नंबरों और फर्जी बैंक खातों में कुल 4,50,000 रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
साइबर पोर्टल और तकनीकी टीम की भूमिका
शिकायत मिलते ही गांधीनगर पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया। पीड़िता द्वारा दिए गए बैंक ट्रांजैक्शन विवरण के आधार पर साइबर पुलिस पोर्टल के माध्यम से आवश्यक और सूक्ष्म तकनीकी जानकारी जुटाई गई। बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल फुटप्रिंट्स के अवलोकन से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ठगी गई रकम सीधे भारतीय स्टेट बैंक (SBI), फिनो पेमेंट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के कुछ विशिष्ट बैंक खातों में जमा की गई थी।
इन खातों को खंगालने पर पता चला कि यह सभी ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) थे, जिनका उपयोग केवल अवैध पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। आरोपियों ने जैसे ही रकम खातों में प्राप्त की, उसे तत्काल अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया और विभिन्न एटीएम काउंटरों व ऑनलाइन माध्यमों से आहरित कर नकदी निकाल ली। पुख्ता तकनीकी सबूत, लिंक मोबाइल नंबरों के लोकेशन और बैंक खाताधारकों के पते मिलने के बाद सरगुजा पुलिस द्वारा एक विशेष टीम गठित की गई और उसे तत्काल मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के लिए रवाना किया गया।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से हुई गिरफ्तारी
पुलिस टीम ने टीकमगढ़ में घेराबंदी कर संदिग्धों को हिरासत में लिया, जहां पूछताछ में उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों का विवरण इस प्रकार है:
काशिराम अहिरवार (पिता: धनसु राम अहिरवार, उम्र: 34 वर्ष) – निवासी: ग्राम केनवार, थाना बड़ागांव, जिला टीकमगढ़ (म.प्र.)
पन्नालाल यादव (पिता: शीतल यादव, उम्र: 40 वर्ष) – निवासी: ग्राम डुण्डा, थाना बड़ागांव, जिला टीकमगढ़ (म.प्र.)
अभिलाषा अहरवार (पिता: किशोरी अहरवार, उम्र: 20 वर्ष) – निवासी: चौपरा मोहल्ला, ग्राम जरूआ, थाना लिधौरा, जिला टीकमगढ़ (म.प्र.)
पुलिस ने तीनों को विधिवत गिरफ्तार कर छत्तीसगढ़ लाया, जहां से उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य हिस्सों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसके संबंध में गहन जांच जारी है और मामले में शामिल कुछ अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
कार्रवाई में शामिल जांबाज पुलिस टीम
इस पूरी अंतरराज्यीय सफल कार्रवाई में थाना गांधीनगर के थाना प्रभारी व निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, उपनिरीक्षक दिलीप दुबे, आरक्षक दीनदयाल सिंह, दिनेश यादव, सरस्वती सिंह तथा साइबर सेल से आरक्षक अमन पूरी एवं रमेश प्रसाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रही।

