सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चों की पहचान करने और उनके लिए एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित यह बैठक समग्र शिक्षा सूरजपुर द्वारा छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य परियोजना कार्यालय रायपुर के निर्देशों के परिपालन में बुलाई गई थी।
इस उच्च स्तरीय बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा, डीएमसी मनोज साहू, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कपिल देव पैकरा सहित महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग और समावेशी शिक्षा के अधिकारी शामिल हुए। इसके साथ ही जिले के समस्त बीईओ, बीआरसी, स्पेशल एजुकेटर तथा संबंधित विभागीय अमले ने भी इस कार्यशाला में हिस्सा लिया।
कोई भी पात्र बच्चा न छूटे: कलेक्टर के कड़े निर्देश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर रेना जमील ने सभी संबंधित विभागों और सर्वेक्षण दलों को अत्यधिक संवेदनशीलता और बारीकी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले का कोई भी पात्र बच्चा इस सर्वेक्षण से वंचित नहीं रहना चाहिए।
कलेक्टर ने मुख्य रूप से निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए:
घर-घर पहुंचेगा सर्वेक्षण दल: 0 से 18 वर्ष के बच्चों की पहचान के लिए एक ठोस और योजनाबद्ध कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके तहत सर्वे टीमें सीधे परिवारों के घरों तक पहुंचेंगी।
लक्षणों की सूक्ष्म पहचान: कलेक्टर ने जोर देकर कहा कि कई दिव्यांगताएं ऐसी होती हैं जिन्हें केवल देखकर नहीं पहचाना जा सकता। इसके लिए एक विशेष चेकलिस्ट और बेहतर रणनीति के साथ काम किया जाए ताकि हर प्रकार की दिव्यांगता के लक्षणों की बारीकी से पहचान कर उसकी सही श्रेणी तय की जा सके।
डेटा की शुद्धता और डिजिटल एंट्री: सर्वे प्रपत्र भरने में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी गई है। डिजिटल एंट्री के दौरान डेटा की शुद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी ताकि आंकड़ों में कोई त्रुटि न हो।
आधार कार्ड का सत्यापन: सर्वेक्षण के दौरान बच्चों के आधार कार्ड की वास्तविक स्थिति का भी आकलन किया जाएगा और आधार से जुड़ी जानकारियों को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा।
समय-सीमा: जिले में इस सर्वेक्षण के तहत जिला स्तर पर सत्यापन (Verification) का कार्य 04 जून से शुरू होकर 17 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा।
सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य और लाभ
कार्यशाला में बताया गया कि इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की समय पर पहचान कर उसे समाज और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस सर्वे के माध्यम से बच्चों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:
विशेष शिक्षण सामग्री और सहायक उपकरणों (जैसे व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र आदि) की उपलब्धता।
मेडिकल जांच शिविरों का आयोजन और दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रदान करने की प्रक्रिया में सहयोग।
भविष्य में सरकार द्वारा बनाई जाने वाली नीतियों और बजट निर्माण के लिए एक सटीक और प्रामाणिक डेटाबेस तैयार करना।
वर्तमान आंकड़े और विकासखंडवार (Block-wise) स्थिति
बैठक में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूरजपुर जिले में वर्तमान में 3461 दिव्यांग बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों में दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित, चलन बाधित, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट अधिगम अक्षमता और सिकल सेल सहित कुल 20 प्रकार की दिव्यांगता श्रेणियां शामिल हैं।
जिले के विभिन्न विकासखंडों में चिन्हांकित बच्चों की संख्या इस प्रकार है:
विकासखंड (Block) चिन्हांकित दिव्यांग बच्चों की संख्या
सूरजपुर 1017 (सर्वाधिक)
प्रतापपुर 645
भैयाथान 612
ओड़गी 595
रामानुजनगर 350
प्रेमनगर 242
कुल पंजीकृत बच्चे 3461
सर्वेक्षण दल को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान उपस्थित शिक्षकों और सर्वेक्षकों को केस स्टडी (प्रायोगिक अभ्यास) के माध्यम से विभिन्न दिव्यांगताओं के लक्षणों को पहचानने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में कुछ प्रमुख लक्षणों को रेखांकित किया गया:
कम दृष्टि: यदि कोई बच्चा दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता या पढ़ते समय किताब को आंखों के अत्यधिक पास लाता है।
श्रवण बाधिता: यदि किसी बच्चे को बार-बार निर्देश दोहराने की आवश्यकता पड़ती है या वह केवल बहुत तेज आवाज ही सुन पाता है।
विशिष्ट अधिगम अक्षमता अक्षरों को उल्टा लिखना, पढ़ने में कठिनाई महसूस करना या गणितीय गणनाओं को समझने में समस्या होना।

