खेत बचाओ अभियान: सोनगरा में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, जैविक कृषि और मृदा स्वास्थ्य पर जोर

Deshkibaat24
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सूरजपुर : जिले के ग्राम पंचायत सोनगरा में कृषि विभाग द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत एक दिवसीय कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण किसानों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को रोकना, मिट्टी की उत्पादकता को बचाना और किसानों को पर्यावरण-अनुकूल व टिकाऊ खेती की ओर अग्रसर करना है।
प्रशासनिक मार्गदर्शन और नेतृत्व
इस वृहद जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर रेना जमील, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) विजेंद्र सिंह पाटले तथा उप संचालक कृषि संपदा पैकरा के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान धरातल पर किसानों को मार्गदर्शन देने के लिए प्रतापपुर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी शिव शंकर यादव और सोनगरा के कृषि विकास अधिकारी शैलेन्द्र पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा किया गया।
संतुलित उर्वरक और प्राकृतिक खेती समय की मांग
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा ने किसानों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भूमि की उर्वरता लगातार घट रही है और पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे में मिट्टी की सेहत को दुरुस्त रखने और मानव स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करना और जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी मांग है। इस विचार का समर्थन करते हुए स्थानीय सरपंच कृष्णा सिंह ने भी ग्रामीणों से पारंपरिक और सुरक्षित खेती की ओर लौटने की अपील की।
रासायनिक खादों के विकल्प और जैविक कीटनाशक बनाने की विधि
कृषि विशेषज्ञों ने सत्र के दौरान किसानों को तकनीकी और वैज्ञानिक जानकारियां प्रदान कीं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई:
मृदा स्वास्थ्य पत्रक (Soil Health Card): वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच करवाएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अनुशंसित मात्रा के आधार पर ही खादों का संतुलित उपयोग करें।
घरेलू जैविक कीटनाशक (Bio-Pesticides): बाजार में मिलने वाले महंगे और हानिकारक रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में किसानों को घर पर ही स्थानीय संसाधनों से नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्निअस्त्र बनाने की प्राकटिकल विधि सिखाई गई।
आधुनिक और नैनो उर्वरक: यूरिया और डीएपी (DAP) के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों ने किसानों को नैनो उर्वरक, जैव उर्वरक (Bio-fertilizers) और जैविक खाद के प्रयोग के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही खेतों में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए हरित खाद और नीलहरित काई के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई। किसानों से अपील की गई कि वे पारंपरिक खादों के स्थान पर एनपीके (NPK) और एसएसपी (SSP) जैसे पर्यावरण-अनुकूल उर्वरकों को प्राथमिकता दें।
शासकीय योजनाओं की तकनीकी जानकारी और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
अभियान के अंतर्गत किसानों को केवल तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और शासकीय रूप से सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। किसानों को फार्मर आईडी बनाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लाभ उठाने, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के सुचारू संचालन के संबंध में विस्तार से समझाया गया।
इस अवसर पर कृषि के क्षेत्र में नए प्रयोग करने वाले और उत्कृष्ट फसल उत्पादन करने वाले क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों को मंच पर सम्मानित भी किया गया, ताकि अन्य ग्रामीण भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
30 जून तक पूरे जिले में चलेगा अभियान
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जागरूकता का यह सिलसिला अभी थमेगा नहीं। आगामी 30 जून 2026 तक जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों, विकासखंडों तथा जिला स्तर पर सघन रूप से कृषक संगोष्ठियों, कृषि चौपालों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा। इसके साथ ही आगामी खरीफ 2026 फसल सत्र को ध्यान में रखते हुए उन्नत फसल उत्पादन विषय पर वैज्ञानिकों के साथ विशेष परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे सूरजपुर जिले के किसानों को कृषि को अधिक लाभकारी और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

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