सूरजपुर: बंद खदानों के सुरक्षित प्रबंधन और ‘जस्ट ट्रांजिशन’ को लेकर कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक आयोजित

Deshkibaat24
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सूरजपुर : जिला प्रशासन ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के सतत और समावेशी विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर रेना जमील की अध्यक्षता में माइनिंग क्लोजर प्लान (खनन बंद करने की योजना) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले की उन खदानों के सुरक्षित प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और वहां के प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई, जहाँ अब खनन का काम पूरी तरह बंद हो चुका है।
हजारों हेक्टेयर भूमि के प्रबंधन पर चर्चा
बैठक के दौरान साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अधिकारियों ने जिले में बंद पड़ी खदानों के आंकड़ों की विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि:
वर्ष 2009 से पूर्व बंद हुई खदानें: जिले में ऐसी तीन खदानें हैं जो साल 2009 से पहले ही बंद हो चुकी हैं। इन तीनों खदानों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1103 हेक्टेयर है।
बिश्रामपुर ओपन कास्ट माइन (OCM): इस प्रमुख खदान में वर्ष 2018 से उत्पादन पूरी तरह बंद है। इसका कुल क्षेत्रफल 1472 हेक्टेयर है।
इतने बड़े पैमाने पर मौजूद खाली और प्रभावित भूमि का पर्यावरण सम्मत और जन-उपयोगी प्रबंधन करना प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिस पर बैठक में गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।
स्थानीय सहभागिता और पारदर्शिता पर जोर
कलेक्टर रेना जमील ने एसईसीएल और संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि क्लोजर प्लान का क्रियान्वयन पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि खदान बंद होने के बाद उस क्षेत्र के बेहतर उपयोग की कार्ययोजना हवा में तैयार न की जाए, बल्कि इसमें स्थानीय ग्राम पंचायतों और प्रभावित समुदायों को भी शामिल किया जाए। स्थानीय लोगों की सहभागिता से ही भूमि का सही और व्यावहारिक पुनरुपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
‘जस्ट ट्रांजिशन’ और वैकल्पिक आजीविका सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक का एक मुख्य केंद्र बिंदु ‘जस्ट ट्रांजिशन’ (खनन अर्थव्यवस्था से गैर-खनन अर्थव्यवस्था की ओर सुरक्षित बदलाव) रहा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि खदानें बंद होने का सबसे सीधा असर वहां काम करने वाले श्रमिकों और आस-पास के गांवों पर पड़ता है।
अतः प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि:
रोजगार के वैकल्पिक साधन: प्रभावित परिवारों और श्रमिकों को आजीविका के नए और सुरक्षित साधन मिल सकें।
कौशल विकास: स्थानीय युवाओं और प्रभावित परिवारों के सदस्यों को नए उद्योगों या व्यवसायों के अनुकूल बनाने के लिए विशेष कौशल विकास (Skill Development) कार्यक्रम चलाए जाएं।
बुनियादी सुविधाएं: खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण की सरकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि वहां के लोगों का सामाजिक उत्थान हो सके।
पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास
खदान बंद होने के बाद पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना और क्षेत्र को फिर से हरा-भरा बनाना भी इस क्लोजर प्लान का एक अनिवार्य हिस्सा है। बैठक के अंत में कलेक्टर ने दोहराया कि खनन से प्रभावित हुए क्षेत्रों का सतत (Sustainable) और समावेशी विकास करना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों सहित जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

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