अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में साइबर अपराधों और अवैध वित्तीय लेन-देन के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश अग्रवाल के सख्त दिशा-निर्देशों के तहत सरगुजा पुलिस ने म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts), पीओएस मशीन दुरुपयोग और फर्जी सिम कार्ड रैकेट के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में गांधीनगर थाना पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए अवैध बैंक खातों की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक और आरोपी को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है, जबकि इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
मुखबिर की सूचना पर हुआ था सनसनीखेज खुलासा
पुलिस से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, इस पूरे संगठित गिरोह का खुलासा 19 मार्च 2026 को हुआ था। गांधीनगर पुलिस को गोपनीय मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि एसबीआई बैंक शाखा बनारस रोड अम्बिकापुर के समीप स्थित एक भवन की दूसरी मंजिल पर किराए का कमरा लेकर राहुल गुप्ता नामक युवक संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। राहुल गुप्ता मूल रूप से राजेश गुप्ता का पुत्र है और वह अम्बिकापुर क्षेत्र के स्थानीय सीधे-साधे और आर्थिक रूप से कमजोर नवयुवकों को जाल में फंसाता था।
वह इन युवाओं को थोड़े से पैसों का लालच देकर उनके नाम पर नई सिम कार्ड खरीदवाता था। इसके बाद उन्हीं सिम कार्डों का उपयोग कर विभिन्न प्रतिष्ठित बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। खाता खुलते ही वह पासबुक, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल और चेकबुक अपने कब्जे में ले लेता था। इन एक्टिवेटेड बैंक खातों और सिम कार्डों को वह ऊंचे दामों पर साइबर ठगों और वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों को बेच देता था, ताकि देश के किसी भी हिस्से में हुई ठगी की रकम को इन खातों में ट्रांसफर कर सुरक्षित रूप से निकाला जा सके। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने थाना गांधीनगर में अपराध क्रमांक 151/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 317(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
जांच में खुली परतें: 3,000 रुपये में बेचे गए थे अपने ही बैंक खाते
थाना गांधीनगर में मुख्य आरोपी राहुल गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान पुलिस ने उसके ठिकाने से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज और पासबुक बरामद की थीं। जांच अधिकारियों को राहुल गुप्ता के कब्जे से नीरज गुप्ता के नाम की कई पासबुक मिलीं, जो एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक), सेंट्रल बैंक और यूको बैंक की थीं। इन खातों के विस्तृत स्टेटमेंट खंगालने पर पुलिस के होश उड़ गए, क्योंकि इनमें बेहद कम समय में लाखों-करोड़ों रुपये का अत्यधिक और संदिग्ध लेन-देन पाया गया था। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि ये सभी ट्रांजेक्शन साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी की रकम से जुड़े हुए थे।
संदेह पुख्ता होने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नीरज गुप्ता (उम्र 25 वर्ष, निवासी: गौशाला रोड डिगमा, थाना गांधीनगर, जिला सरगुजा, पिता: राजेश गुप्ता) को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पुलिस के सामने दिए अपने मेमोरेण्डम कथन में नीरज गुप्ता ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने स्वीकार किया कि उसने महज 3,000 रुपये प्रति खाते के लालच में आकर अपने खुद के तीन बैंक खाते और अपने सगे भाई पंकज का एक बैंक खाता इस गिरोह के एक अन्य सदस्य विकास किर्तनिया को बेच दिया था। अपराध में सीधी संलिप्तता और पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने नीरज गुप्ता को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
मुख्य सरगना समेत अब तक 11 आरोपी सलाखों के पीछे
सरगुजा पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि यह नेटवर्क बेहद पेशेवर तरीके से काम कर रहा था। पुलिस इस मामले में मुख्य सरगना राहुल गुप्ता को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। राहुल गुप्ता के अलावा इस पूरे रैकेट में शामिल खातों के खरीदार, सिम का इंतजाम करने वाले और दलालों सहित अन्य 10 संलिप्त आरोपियों को पहले ही अलग-अलग चरणों में गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। नीरज गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में कुल गिरफ्तारियों का आंकड़ा 11 तक पहुंच गया है। पुलिस अब इन खातों के जरिए देश भर में हुए साइबर अपराधों की कड़ियों को जोड़ने के लिए केंद्रीय साइबर सेल की भी मदद ले रही है।
पुलिस टीम की तत्परता की सराहना
इस बड़े अंतरराज्यीय प्रभाव वाले साइबर वित्तीय अपराध के नेटवर्क को ध्वस्त करने में गांधीनगर थाना पुलिस की टीम ने अत्यंत सराहनीय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसएसपी के निर्देश पर गठित इस विशेष टीम का नेतृत्व थाना प्रभारी व निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी कर रहे थे। इस पूरी छापेमारी, धरपकड़ और तकनीकी विवेचना की कार्रवाई में आरक्षक अरविंद उपाध्याय, आरक्षक अमृत सिंह, आरक्षक विकास सिंह और आरक्षक रिषभ सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
सरगुजा पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को पैसों के लालच में आकर अपना बैंक खाता, सिम कार्ड, आधार कार्ड या एटीएम कार्ड इस्तेमाल करने के लिए न दें, अन्यथा वे भी अनजाने में गंभीर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
साइबर अपराधियों के चक्रव्यूह पर सरगुजा पुलिस का प्रहार: म्यूल बैंक अकाउंट और फर्जी सिम रैकेट का भंडाफोड़, एक और आरोपी गिरफ्तार
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