बलरामपुर: फर्जी निवास प्रमाण पत्र के दम पर सेना में भर्ती होने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, मुख्य सरगना सहित 4 गिरफ्तार

Deshkibaat24
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बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला पुलिस ने एक ऐसे बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के सहारे छत्तीसगढ़ राज्य का स्थानीय निवास प्रमाण पत्र बनवाकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में अवैध तरीके से नौकरियां हासिल कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह गिरोह मध्य प्रदेश और राजस्थान के युवकों को छत्तीसगढ़ के कोटे का अवैध लाभ दिलाकर सेना में भर्ती करा रहा था।
तहसीलदार की शिकायत पर खुली फाइल
मामले का खुलासा तब हुआ जब २८ अप्रैल २०२६ को तहसीलदार बलरामपुर ने स्थानीय थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि २०४ कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ (करनपुर, जगदलपुर) में पदस्थ कांस्टेबल सुमित (पिता: अचल सिंह) ने तहसील कार्यालय बलरामपुर से ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से एक बड़ा फर्जीवाड़ा किया है।
सुमित ने छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी विशाल सोनी (पिता: दिवंगत सुरेश सोनी) के शैक्षणिक व अन्य आवश्यक दस्तावेजों में डिजिटल छेड़छाड़ (कूटरचना) की। उसने उन दस्तावेजों में अपने नाम का उल्लेख कर ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया और फर्जी तरीके से स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
पुलिस की पहली कार्रवाई और गिरफ्तारी
तहसीलदार की शिकायत के बाद बलरामपुर पुलिस ने आरोपी सुमित (निवासी: ग्राम रूँध, थाना मनिया, जिला धौलपुर, राजस्थान) व अन्य के खिलाफ अपराध क्रमांक ७८/२०२६ के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा ३१८(२), ३१९(२), ३३६(३), ३३८, ३४०(२), ६१(२)(a) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा ६६(सी), ६६(डी) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया।
जांच के दौरान १४ मई २०२६ को पुलिस ने आरोपी सुमित को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। सुमित छत्तीसगढ़ राज्य के कम कट-ऑफ कोटे का अवैध लाभ लेकर वर्ष २०२३ में एसएससी (SSC) के माध्यम से सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था।
रायपुर से दबोचे गए मध्य प्रदेश के मास्टरमाइंड
सुमित से कड़ाई से पूछताछ और मामले की अग्रिम विवेचना के बाद पुलिस के हाथ इस रैकेट के मुख्य किरदारों तक पहुंचे। २२ मई २०२६ को पुलिस ने राजधानी रायपुर में दबिश देकर मुख्य अभियुक्त विवेक सिंह तोमर (उम्र २४ वर्ष, निवासी: ग्राम खांद का पुरा, थाना अंबा, जिला मुरैना, मध्य प्रदेश) और उसके सह-आरोपी आकाश सिंह (उम्र २२ वर्ष, निवासी: चांद का पुरा, थाना अंबा, जिला मुरैना, मध्य प्रदेश) को हिरासत में लिया। २३ मई २०२६ को दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें:
मुख्य आरोपी का खुद का प्रमाण पत्र फर्जी: जांच में पाया गया कि मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर ने खुद भी डोंगरगढ़ (राजनांदगांव) से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र बनवाया था।
पहचान बदलकर धोखाधड़ी: सह-आरोपी आकाश सिंह (आकाश शर्मा) ने अपना नाम बदलकर ‘तुकेश्वर पिता भोजराम’ (निवासी: पुलिस लाइन के पीछे, बलरामपुर) के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कर रखा था। इसके साथ ही उसने बलरामपुर के स्थानीय निवासी दीपक चौरसिया के शैक्षणिक दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर खुद का फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करवाया था।
राजनांदगांव से पकड़ा गया डिजिटल कूटकार (एडिटर)
इस गिरोह के डिजिटल नेटवर्क को खंगालते हुए बलरामपुर पुलिस ने २७ मई २०२६ को राजनांदगांव से ओमप्रकाश चंद्रवंशी (उम्र २८ वर्ष, निवासी: ग्राम सीतागोटा, थाना बाघनदी, जिला राजनांदगांव) को गिरफ्तार किया। ओमप्रकाश इस गिरोह के लिए कंप्यूटर पर दस्तावेजों को एडिट करने का काम करता था।
प्रति प्रमाण पत्र ३ से ४ लाख का खेल:
पूछताछ में ओमप्रकाश चंद्रवंशी ने कबूला कि मध्य प्रदेश का विवेक सिंह तोमर उसके पास बाहरी राज्यों के युवकों के नाम भेजता था। ओमप्रकाश ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी ‘सिटीजन आईडी’ बनाता था। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के असली दस्तावेजों को डाउनलोड कर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से उनमें बाहरी उम्मीदवारों का नाम और फोटो एडिट (मिक्स) कर देता था।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह ऑनलाइन आवेदन सबमिट कर निवास प्रमाण पत्र जारी करवा लेता था। इस काम के लिए ओमप्रकाश को प्रति व्यक्ति ४ से ५ हजार रुपये मिलते थे, जबकि मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर एक प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में उम्मीदवारों से ३ से ४ लाख रुपये वसूलता था। पुलिस ने ओमप्रकाश के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल कंप्यूटर सिस्टम को जब्त कर लिया है।
डोंगरगढ़ से २५ और फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की आशंका, जांच का दायरा बढ़ा
बलरामपुर पुलिस के अनुसार, केंद्रीय पुलिस बलों (जैसे CRPF, SSB, CISF) की भर्ती में छत्तीसगढ़ राज्य का ‘कट-ऑफ मार्क्स’ अन्य राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश) की तुलना में काफी कम रहता है। इसी का फायदा उठाने के लिए बाहरी राज्यों के गिरोह सक्रिय हैं।
अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बलरामपुर के अलावा तहसील कार्यालय डोंगरगढ़ से भी लगभग २० से २५ स्थानीय निवास प्रमाण पत्र इसी फर्जी तरीके से जारी करवाए गए हैं। इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर कई गैर-निवासी युवक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नौकरी पा चुके हैं या पाने का प्रयास कर रहे हैं। बलरामपुर पुलिस अब इन सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच कर रही है और संबंधित सुरक्षा बलों के मुख्यालयों से पत्राचार कर धोखे से नौकरी पाने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी बड़ी वैधानिक कार्रवाई की तैयारी में है।

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