विशेष रिपोर्ट: करोड़ों के ‘शेयर’ या कागजी मायाजाल? चिरमिरी के निवेशकों को दिखाए जा रहे पोर्टफोलियो का कच्चा चिट्ठा

Deshkibaat24
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चिरमिरी के चर्चित निवेश घोटाले में आरोपी राजेश कुमार गुप्ता द्वारा निवेशकों को दिए जा रहे ‘भरोसे’ की जब पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। राजेश गुप्ता जिन शेयर सर्टिफिकेट्स को अपनी संपत्ति बताकर समय मांग रहा है, उनमें से अधिकांश या तो ऐसी कंपनियों के हैं जो घाटे में हैं, या जिनका बाजार अस्तित्व (Listing) ही नहीं है।
शेयरों का विस्तृत विवरण और वर्तमान स्थिति
राजेश और पूजा गुप्ता के पोर्टफोलियो में शामिल प्रमुख कंपनियों के शेयरों का विवरण इस प्रकार है:

कंपनी का नाम शेयरधारक शेयरों की संख्या फोलियो / रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित मूल्य (Face Value) वर्तमान स्थिति (Market Status)
Metropolitan Stock Exchange (MSE) राजेश कुमार गुप्ता 1,00,00,000 259392 (Cert: 367195) ₹10 यह स्टॉक एक्सचेंज बहुत कम सक्रिय है। इसके अनलिस्टेड शेयर की कीमत ₹1 से भी कम हो सकती है।
API Holdings (PharmEasy) राजेश कुमार गुप्ता 50,00,000 0436180 (Cert: 02680093) ₹1 वर्तमान में इसके अनलिस्टेड शेयर की कीमत मात्र ₹5 से ₹6 के आसपास है। कंपनी भारी घाटे में चल रही है।
Oravel Stays (OYO) राजेश कुमार गुप्ता 5,00,000 256845 (Cert: 154785) ₹10 इसके अनलिस्टेड शेयर की कीमत लगभग ₹20 से ₹25 के बीच है। बाजार में इसकी तरलता (Liquidity) बहुत कम है।
Dreamplug Tech (CRED) राजेश / पूजा गुप्ता 2,00,000 24486222 (Cert: 02681936) ₹10 यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। इसके शेयर बेचना लगभग नामुमकिन है क्योंकि यह स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते।
Indian Commodity Exchange (ICEX) राजेश कुमार गुप्ता 10,00,000 000388479 (Cert: 001260612) ₹5 सबसे बड़ा झटका: SEBI ने इस एक्सचेंज की मान्यता रद्द कर दी है। इसके शेयरों की वैल्यू वर्तमान में शून्य या रद्दी के बराबर है।
Wakefit Innovations राजेश कुमार गुप्ता 1,00,000 Cert: 02681284 ₹10 यह प्रेफरेंस शेयर हैं, जो केवल कंपनी के बायबैक या IPO के समय ही कैश कराए जा सकते हैं।

न्यूज़ विश्लेषण: क्या वाकई पैसा वापस मिलेगा?
1. रद्दी बन चुके कागजात:
आरोपी द्वारा दिखाए जा रहे दस्तावेजों में ICEX जैसी कंपनियों के शेयर हैं, जिनकी मान्यता भारत सरकार और SEBI ने खत्म कर दी है। ऐसे में इन शेयरों के बदले पैसा मिलने का दावा पूरी तरह झूठा है।
2. अनलिस्टेड शेयरों का भ्रम:
राजेश गुप्ता जिन करोड़ों रुपयों की बात कर रहा है, वे ‘अनलिस्टेड’ शेयरों पर आधारित हैं। शेयर बाजार का नियम है कि जब तक कोई कंपनी शेयर बाजार (BSE/NSE) पर लिस्ट नहीं होती, तब तक उसके शेयर को कोई भी सामान्य व्यक्ति नहीं खरीदता। इन कागजों को दिखाकर जनता को केवल यह एहसास कराया जा रहा है कि आरोपी ‘अमीर’ है, जबकि नकदी (Cash) के रूप में उसके पास कुछ नहीं है।
3. रजिस्ट्रेशन नंबर और वैधता:
यद्यपि ये प्रमाणपत्र देखने में आधिकारिक लगते हैं और इनमें कंपनी के सील-सिक्के भी हैं, लेकिन निवेश की दुनिया में ये ‘इललिक्विड एसेट्स’ (Illiquid Assets) कहलाते हैं, जिन्हें बेचकर तुरंत पैसा नहीं निकाला जा सकता।
निष्कर्ष: निवेशकों के लिए चेतावनी
आरोपी राजेश गुप्ता और उसके साथी जैसे विकास पांडे, इन कागजों का उपयोग पीड़ितों के आक्रोश को शांत करने के लिए एक ‘मनोवैज्ञानिक ढाल’ के रूप में कर रहे हैं। जिस व्यक्ति ने करोड़ों रुपये नकद लिए हों, वह उन पैसों को वापस करने के बजाय रद्दी हो चुके शेयर प्रमाणपत्रों का हवाला दे रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह: इन शेयर सर्टिफिकेट्स की वर्तमान वैल्यू निवेशकों द्वारा दिए गए मूलधन के 10% के बराबर भी नहीं है। जनता को 30 मई या 2026 की ‘तारीख’ के जाल में फंसने के बजाय कानूनी कार्रवाई पर जोर देना चाहिए, क्योंकि ये कागजात बैंक में जमा करने लायक भी नहीं हैं।

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