सड़कों पर दौड़ता ‘काला काल’ कोयला ट्रकों की रफ्तार ने ली एक और बेजुबान की जान, प्रशासन मौन

Deshkibaat24
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सूरजपुर/कसकेला: जिले के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में से एक, जो कसकेला, करसू, अंबिकापुर और बिश्रामपुर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ता है, इन दिनों ‘खूनी सड़क’ में तब्दील होता जा रहा है। नेशनल हाईवे न होने के बावजूद इस मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव किसी बड़े राजमार्ग से कम नहीं है, लेकिन यहाँ कोयला परिवहन में लगे ट्रकों की बेलगाम रफ्तार ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।
ताजा घटना: लटोरी की ओर से आ रहे ट्रक ने मवेशी को कुचला
ताजा मामला कसकेला और करसू गांव के बीच का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लटोरी की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार कोयला लदे ट्रक ने सड़क पार कर रहे एक मवेशी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि मवेशी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन समेत भागने में सफल रहा, जो इस मार्ग पर एक आम बात बन चुकी है।
दो चौकियों के बीच ‘नो मैन्स लैंड’ बना यह मार्ग
भौगोलिक दृष्टि से यह सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद मजबूत होनी चाहिए थी, क्योंकि यहाँ प्रशासनिक पहरा दोहरा है:
एक तरफ जयनगर थाना क्षेत्र की लटोरी पुलिस चौकी की सीमा लगती है।
दूसरी तरफ बिश्रामपुर थाना क्षेत्र की करंजी पुलिस चौकी का प्रभाव क्षेत्र है।
विडंबना यह है कि दो-दो पुलिस चौकियों की मौजूदगी के बाद भी भारी वाहनों की ओवरस्पीडिंग पर कोई नियंत्रण नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस का ध्यान केवल कागजी कार्रवाई और छोटे वाहन चालकों पर होता है, जबकि मौत बनकर दौड़ रहे इन भारी ट्रकों को खुली छूट मिली हुई है।
संपर्क मार्ग का महत्व और बढ़ता खतरा
यह मार्ग अंबिकापुर और बिश्रामपुर को जोड़ने वाली एक प्रमुख लाइफलाइन है। कसकेला, करसू, करंजी और सोनपुर जैसे घनी आबादी वाले गांव इसी सड़क के किनारे बसे हैं।
अंधाधुंध परिवहन: महान-2 खदान से निकलने वाला कोयला इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
नियमों की अनदेखी: ट्रकों के लिए कोई समय सारणी या गति सीमा का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया है।
रिहायशी इलाकों में डर: करसू चौक और सोनपुर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
आक्रोशित जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस हादसे ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आज एक मवेशी की जान गई है, कल कोई स्थानीय नागरिक या स्कूल जाने वाला बच्चा भी इसका शिकार हो सकता है।
प्रशासन से प्रमुख मांगें:
गति अवरोधक  करसू, कसकेला और अन्य प्रमुख चौकों पर तत्काल प्रभाव से मानक स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं।
नियमित पेट्रोलिंग: लटोरी और करंजी पुलिस की संयुक्त टीम व्यस्त समय में ट्रकों की गति की जांच करे।
परमिट रद्द हो: बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले ट्रांसपोर्टरों और चालकों के परमिट निरस्त किए जाएं।
निष्कर्ष:
क्षेत्र की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने इन ‘मौत के सौदागरों’ पर लगाम नहीं कसी, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र चक्काजाम और आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

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