सूरजपुर: मोहिबुल हसन (लोलो)आधुनिक दौर में जहाँ छोटी-छोटी गलतफहमियों के कारण वैवाहिक रिश्ते टूटने की कगार पर पहुँच रहे हैं, वहीं सूरजपुर में अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद (IHRC) बिखरते परिवारों को जोड़ने के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। जिला महिला परामर्श केंद्र में आयोजित विशेष सुनवाई के दौरान परिषद ने अपनी प्रभावी मध्यस्थता से कई परिवारों को टूटने से बचा लिया।
मध्यस्थता से बची गृहस्थी: ‘दो दिल और दो घर’ हुए एक
बीते 03 अप्रैल 2026 को जिला महिला परामर्श केंद्र में घरेलू हिंसा और आपसी मनमुटाव से संबंधित विभिन्न संवेदनशील मामलों की सुनवाई की गई। इस सत्र में परिषद के जिला अध्यक्ष अब्दुल रब सिद्दीकी और जिला उपाध्यक्ष परमहंस मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
परामर्श केंद्र के ASI और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों को विस्तार से सुना गया। कई मामलों में पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि बात अलगाव तक पहुँच चुकी थी, लेकिन परिषद के पदाधिकारियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें फिर से साथ रहने के लिए प्रेरित किया।
“संवाद से संभव है समाधान” – अब्दुल रब सिद्दीकी
मामलों को सुलझाते हुए जिला अध्यक्ष अब्दुल रब सिद्दीकी ने कहा कि परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा:
“छोटी-छोटी गलतफहमियों के कारण परिवारों का टूटना केवल पति-पत्नी के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक और सामाजिक भविष्य के लिए भी घातक है। हमारा उद्देश्य है कि कानूनी पेचीदगियों में फँसने से पहले आपसी संवाद के जरिए रिश्तों को एक और मौका दिया जाए।”
नई शुरुआत का संकल्प
परिषद की समझाइश और अनुभवी राय का सकारात्मक असर देखने को मिला। कई जोड़ों ने अपने पुराने मतभेदों को भुलाकर आपसी सहमति से फिर से नया जीवन शुरू करने का संकल्प लिया। परामर्श के अंत में जोड़ों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सामंजस्य बनाए रखने का वादा किया।
प्रशासन और परिषद का साझा प्रयास
जिला उपाध्यक्ष परमहंस मिश्रा ने विश्वास दिलाया कि अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद, सूरजपुर भविष्य में भी सामाजिक न्याय और पारिवारिक एकजुटता सुनिश्चित करने के लिए शासन-प्रशासन के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करती रहेगी।
बिखरते परिवारों के लिए ‘वरदान’ बनी अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद, आपसी सहमति से सुलझाए घरेलू हिंसा के मामले
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