चिरमिरी ठगी कांड: अब ‘नकली शेयर बॉन्ड’ का मायाजाल, दिसंबर 2026 तक का नया ‘एग्रीमेंट’ बना ठगी का हथियार

Deshkibaat24
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चिरमिरी कोयलांचल के सबसे बड़े निवेश घोटाले के आरोपी राजेश कुमार गुप्ता ने ठगी का एक ऐसा जाल बुना है जिसने वित्तीय विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। ‘मोतीलाल ओसवाल’ के नाम का सहारा लेने के बाद अब राजेश गुप्ता फर्जी शेयर बॉन्ड्स दिखाकर लोगों की आंखों में धूल झोंक रहा है।
बाजार में जो लिस्ट ही नहीं, उनके नाम पर बांटे बॉन्ड
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राजेश गुप्ता ने सैकड़ों पीड़ितों को ऐसे शेयर्स के ‘बॉन्ड पेपर’ दिखाए हैं, जो अभी भारतीय शेयर बाजार (NSE/BSE) में लिस्ट तक नहीं हुए हैं।
आरोपी ने इन कागजों को भविष्य का ‘मल्टीबैगर’ (कई गुना रिटर्न देने वाला) बताकर लोगों को झांसे में लिया।
भोले-भाले निवेशकों को यकीन दिलाया गया कि इन शेयर्स की कीमत 2026 तक आसमान छुएगी।
असल में, ये कागजात केवल साधारण प्रिंटेड कागज हैं जिनकी कोई कानूनी या बाजार में मान्यता नहीं है।
दिसंबर 2026 का ‘एग्रीमेंट’— कानूनी शिकंजे से बचने की चाल?
आरोपी की चालाकी यहीं खत्म नहीं होती। पुलिस कार्रवाई और जेल जाने के डर से बचने के लिए उसने पीड़ितों के साथ एक नया खेल खेला है। उसने कई लोगों से स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट करा लिया है कि वह दिसंबर 2026 तक सबका मूलधन और मुनाफा लौटा देगा।
“एग्रीमेंट करना उसकी सोची-समझी रणनीति है ताकि वह मामले को ‘दीवानी मामला’ (Civil Matter) बताकर आपराधिक कार्यवाही (Criminal Case) से बच सके और उसे दो साल का लंबा समय मिल जाए।” — कानूनी विशेषज्ञ
डूबते को तिनके का सहारा, पर सावधान!
शहर के कई लोग, जिनका लाखों रुपया फंसा हुआ है, इस एग्रीमेंट को ‘डूबते को तिनके का सहारा’ मानकर हस्ताक्षर कर चुके हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल समय काटने की साजिश है। बिना SEBI की अनुमति के अनलिस्टेड शेयरों में इस तरह का लेन-देन पूरी तरह अवैध है।
पीड़ितों के लिए चेतावनी के संकेत
नकली बॉन्ड: यदि बॉन्ड पर किसी अधिकृत डिपॉजिटरी (NSDL/CDSL) की मुहर या ‘ISIN’ नंबर नहीं है, तो वह रद्दी मात्र है।
डेडलाइन का खेल: दिसंबर 2026 की लंबी तारीख इसलिए दी गई है ताकि तब तक आरोपी अपनी संपत्तियों को पूरी तरह ठिकाने लगा सके।
कानूनी स्थिति: एग्रीमेंट होने के बावजूद, धोखाधड़ी (IPC 420) का मामला खत्म नहीं होता।
निष्कर्ष और कार्रवाई
राजेश गुप्ता अब न केवल फरार है, बल्कि कागजी हेरफेर के जरिए पीड़ितों को मानसिक रूप से भी बंधक बना रहा है। स्थानीय प्रशासन को तत्काल इन ‘नकली बॉन्ड्स’ की फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए और एग्रीमेंट के नाम पर हो रहे इस नए धोखे को रोकना चाहिए।

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