चिरमिरी ठगी कांड: ‘गोल्ड लोन’ के नाम पर हफ्ता भर घुमाया, अब मोबाइल बंद कर फरार हुआ राजेश गुप्ता

Deshkibaat24
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चिरमिरी/पटना (छत्तीसगढ़): कोयलांचल क्षेत्र के बहुचर्चित निवेश घोटाले में एक नया मोड़ आया है। प्रतिष्ठित ट्रेडिंग फर्म ‘मोतीलाल ओसवाल’ के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाला मुख्य आरोपी राजेश कुमार गुप्ता (पिता: चौधरी गुप्ता) एक बार फिर पीड़ितों को ठेंगा दिखाकर फरार हो गया है। पिछले एक सप्ताह से ‘गोल्ड लोन’ लेकर सबका पैसा चुकता करने का झांसा देने के बाद, अब आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है।
‘गोल्ड लोन’ का नया पैंतरा पड़ा भारी
सूत्रों और पीड़ितों के अनुसार, पिछले एक-दो महीनों से लगातार तारीखें बदलने के बाद राजेश गुप्ता ने एक नया पैंतरा चला था। उसने पीड़ितों को विश्वास दिलाया था कि वह अपने और परिवार के जेवर गिरवी रखकर ‘गोल्ड लोन’ ले रहा है और उसी राशि से सबका हिसाब चुकता कर देगा।
“वह पिछले एक सप्ताह से हमें हर दिन बैंक और गोल्ड लोन की प्रक्रिया का हवाला देकर घुमाता रहा। उसने कहा था कि लोन की राशि मिलते ही सबका RTGS कर दिया जाएगा। लेकिन जैसे ही हफ्ता बीता, उसका फोन बंद हो गया और वह गायब है।” — एक आक्रोशित पीड़ित
मांजा सरभोका के आलीशान घर में छिपने का शक
राजेश गुप्ता के बारे में चर्चा है कि वह कहीं बाहर नहीं, बल्कि पटना (कोरिया) से 10 किमी दूर मांजा सरभोका स्थित अपने आलीशान घर में ही दुबका हुआ है। जब भी कोई तगादा करने पहुंचता है, तो उसके परिजन पुलिस और पीड़ितों को गुमराह करते हैं। आरोपी डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर खुद को रायपुर या अंबिकापुर में बताता है, जबकि उसकी लोकेशन संदिग्ध बनी हुई है।
जनवरी 2026 की डेडलाइन और फर्जी चेक का खेल
आरोपी ने अपनी पत्नी के नाम के चेक बांटकर जनवरी 2026 तक भुगतान का वादा किया था। लोगों को शांत रखने के लिए उसने एक ‘भुगतान समिति’ भी बनाई थी, जो अब पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह लोगों की गाढ़ी कमाई से बेंगलुरु के महंगे अस्पतालों में अपने माता-पिता का इलाज करा रहा है और खुद ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है।
शहर के 80% लोग शिकार, सेबी (SEBI) नियमों की उड़ी धज्जियां
राजेश गुप्ता ने जिस तरह से मोतीलाल ओसवाल जैसी कंपनी के नाम का दुरुपयोग कर शहर के लगभग 80% लोगों को ठगा है, वह वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधे तौर पर SEBI के नियमों का उल्लंघन है और इसमें पुलिस को तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपी की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
करोड़ों की ठगी और आरोपी के बार-बार चकमा देने के बावजूद अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर होना, स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर रहा है। ठगी के शिकार लोगों ने अब सामूहिक रूप से आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाने का मन बना लिया है।

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