सूरजपुर। ठगी के सनसनीखेज मामले में आरोपी मेराज अंसारी उर्फ (लब्लू) को मिली जमानत के बाद अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि जिस आरोपी मेराज अंसारी के खिलाफ उन्होंने मामला दर्ज कराया था, उसे बचाने के लिए एक सोची-समझी पटकथा लिखी जा रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या सूरजपुर कोतवाली मेराज अंसारी को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश कर रही है?
प्रार्थी का पैसा, मेराज का नाम, फिर अशफाक उल्लाह बीच में कहाँ से आया?
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने सारा लेनदेन मेराज अंसारी के साथ किया था। मेराज ने खुद को सर्वेसर्वा बताकर करोड़ों रुपये डकारे, लेकिन जैसे ही कानून का डंडा चला, उसने अशफाक उल्लाह को अपनी ढाल बना लिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
जब प्रार्थियों ने मेराज अंसारी के नाम पर केस दर्ज कराया था, तो पुलिस ने जांच की दिशा को अशफाक उल्लाह की ओर मोड़कर मेराज को “कमज़ोर कड़ी” क्यों दिखाया?
क्या यह मेराज को कानूनी पेचीदगियों से बचाने की कोई गुप्त रणनीति है?
क्या सूरजपुर कोतवाली की भूमिका संदिग्ध है?
आरोपी मेराज अंसारी के जेल से बाहर आने के बाद जिस तरह से वह सीना तानकर घूम रहा है और पीड़ितों को टरका रहा है, उससे आम जनता का पुलिस से भरोसा उठ रहा है। सूत्रों की मानें तो:
नाम बदलने का खेल: जांच के दौरान मुख्य आरोपी के स्थान पर अन्य लोगों का नाम प्रमुखता से उछालना, सीधे तौर पर मेराज को लाभ पहुँचाने जैसा है।
मिलीभगत की बू: पीड़ितों का आरोप है कि कोतवाली के कुछ जिम्मेदार अधिकारी आरोपी के साथ नरमी बरत रहे हैं, जिससे उसकी ‘आलीशान कोठी’ और अवैध संपत्तियों पर अब तक कोई ठोस प्रहार नहीं हुआ।
जांच में हीलाहवाली: एफआईआर के बाद भी मेराज के खिलाफ कठोर धाराओं का खुलासा न करना और चार्जशीट में देरी करना पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
“हमने मेराज को पैसा दिया, कोठी उसने बनाई, ऐश वो कर रहा है… तो फिर हिसाब अशफाक उल्लाह से क्यों? क्या पुलिस हमें पागल बना रही है?” – एक पीड़ित का बयान
मेराज का ‘शिफ्टिंग गेम’: पैसा खुद लिया, नाम दूसरे का दिया
मेराज अंसारी बेहद शातिर तरीके से पूरे मामले को “अशफाक उल्लाह” के नाम से जोड़ रहा है ताकि वह खुद को केवल एक ‘जरिया’ साबित कर सके। जबकि असलियत यह है कि पीड़ितों ने मेराज के चेहरे और उसकी बातों पर भरोसा करके अपनी जीवन भर की कमाई उसे सौंपी थी। जनता अब यह पूछ रही है कि क्या सूरजपुर पुलिस अपराधियों के साथ खड़ी है या न्याय की गुहार लगाने वाले आम नागरिकों के साथ?
सूरजपुर पुलिस की मेहरबानी या मेराज की चालाकी? ठगी के मामले में ‘गुम’ होता मुख्य आरोपी, क्या कोतवाली पुलिस दे रही है साथ?
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