सूरजपुर | सूत्र: घटती-घटना
सूरजपुर जिले में ठगी के एक बड़े मामले ने तूल पकड़ लिया है। ‘घटती-घटना’ द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार, करोड़ों की ठगी के आरोपी अशफाक उल्ला के पिता जरीफुल्लाह, जो कभी बड़ी जोत के किसान थे, आज सरकारी रिकॉर्ड में ‘भूमिहीन’ हो चुके हैं। जबकि ठगी का आरोपी बेटा फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर (फरार) है और लग्जरी गाड़ियों में घूम रहा है।
आखिर 7.7 एकड़ जमीन का रहस्य क्या है?
अखबार की पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जरीफुल्लाह की 3.13 हेक्टेयर (लगभग 7.7 एकड़) कृषि भूमि अब हदीस मोहम्मद, रिजवान अंसारी और साधना कुशवाहा के नाम पर दर्ज हो चुकी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह संपत्ति अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने के लिए हस्तांतरित की गई है?
जांच के घेरे में ‘सिस्टम के भीतर का सिस्टम’
इस पूरे जमीन घोटाले में सरकारी तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
बैंक कर्ज के बावजूद रजिस्ट्री: बताया जा रहा है कि उक्त जमीन पर एचडीएफसी (HDFC) और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक जैसे तीन बैंकों का कर्ज/बोझ दर्ज था। नियमों के मुताबिक, कर्ज वाली जमीन की रजिस्ट्री बिना बैंक एनओसी के नहीं हो सकती। फिर यह किसके आदेश पर हुआ?
किसान पोर्टल पर खुलासा: फॉर्मर इंफॉर्मेशन पोर्टल (Farmer Information Portal) के अनुसार, ग्राम सोनपुर (तहसील भैयाथान) की यह जमीन अब नए स्वामियों के नाम पर धान खरीदी के लिए भी पंजीकृत हो चुकी है।
राजस्व रिकॉर्ड में खेल: कागजों में जरीफुल्लाह को अब भूमिहीन बताया जा रहा है, जबकि उनके पास करोड़ों की पैतृक संपत्ति थी।
पीड़ितों का हाल: हाथ खाली, न्याय का इंतजार
जहाँ एक ओर ठगी के आरोपी की करोड़ों की संपत्ति बेची और खरीदी जा रही है, वहीं ठगी का शिकार हुए गरीब पीड़ित आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनकी गाढ़ी कमाई हड़पने के बाद अब संपत्ति का हेरफेर कर उन्हें भविष्य में मिलने वाले मुआवजे से भी वंचित करने की साजिश रची गई है।
स्थानीय नागरिकों की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय निवासियों और पीड़ितों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
जमीन की बिक्री की पूरी प्रक्रिया को तत्काल रद्द किया जाए।
बैंक एनओसी और राजस्व अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो।
संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से इस पूरे प्रकरण की जांच की जाए।
राजस्व विभाग: भ्रष्टाचार का ‘सेफ हाउस’
जमीन के दस्तावेजों में जिस तरह की बाजीगरी की गई है, वह बिना ‘ऊपर से नीचे तक’ के संरक्षण के मुमकिन नहीं है।
जमीन पर कर्ज, फिर भी रजिस्ट्री: रिकॉर्ड गवाह हैं कि जमीन पर बैंकों का कर्ज था। नियम कहते हैं कि ऐसी जमीन छुई भी नहीं जा सकती, लेकिन सूरजपुर के राजस्व अमले ने ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’ वाली कहावत चरितार्थ करते हुए रातों-रात नामांतरण खेल दिया।
अंधा प्रशासन: क्या कलेक्टर और राजस्व विभाग के आला अधिकारी इतने लापरवाह हैं कि उन्हें करोड़ों के इस ‘लैंड स्कैम’ की भनक तक नहीं लगी? या फिर मौन सहमति के बदले ‘मलाई’ का हिस्सा उन तक भी पहुँचा है?
पीड़ितों का जनाजा और अपराधियों का जलवा
एक तरफ वे पीड़ित हैं जिनका घर ठगी के कारण उजड़ गया, जो न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं। दूसरी तरफ वे ठग हैं जो जेल के अंदर और बाहर, दोनों जगह ‘सिस्टम’ को अपनी जेब में रखकर घूम रहे हैं। यह स्थिति सूरजपुर की शांति और न्याय व्यवस्था के लिए एक कलंक है।
हमारा सीधा सवाल – प्रशासन जवाब दे!
फरार आरोपी की संपत्ति कुर्क करने के बजाय उसे खुर्द-बुर्द करने का मौका क्यों दिया गया?
क्या गृह विभाग और डीजीपी महोदय संज्ञान लेंगे कि सूरजपुर में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है?
बैंकों को चूना लगाने वाले अधिकारियों और खरीदारों पर FIR दर्ज कब होगी?
निष्कर्ष: यदि समय रहते इन ‘सफेदपोश’ मददगारों और जालसाजों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आम जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास उठना तय है। स्थानीय नागरिक अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और तत्काल जमीन कुर्की की मांग कर रहे हैं।
महाठगी का मायाजाल: जेल में पिता भूमिहीन, बाहर बेटा फरारी में; कैसे हुई 7.7 एकड़ जमीन दूसरों के नाम?
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