
सूरजपुर जिले के बलरामपुर गांव से छत्तीसगढ़ के माटी की सोंधी खुशबू अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महकने को तैयार है। सूरजपुर के एक छोटे से गाँव से निकले वेद राम रजवाड़े ने नासिक (महाराष्ट्र) में आयोजित नेशनल मास्टर गेम्स 2026 में अपनी रफ्तार का लोहा मनवाते हुए तीन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी यह जीत केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि सुविधाओं के अभाव पर अटूट हौसलों की विजय है।
तालाब और पोखरी बनीं ‘प्रैक्टिस ग्राउंड’
वेद राम की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। कभी सूरजपुर स्विमिंग पूल में कोच रहे वेद के सामने तब संकट खड़ा हो गया जब शहर का इकलौता पूल बंद हो गया। जहाँ अन्य खिलाड़ी संसाधनों की कमी का रोना रोते, वहीं वेद ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने गाँव के तालाब और बलरामपुर कोल माइंस की पोखरी (गड्ढों) को ही अपना स्विमिंग ट्रैक बना लिया। गंदे पानी और अनिश्चित गहराई के बीच की गई उनकी कड़ी मेहनत ने आज उन्हें ‘गोल्डन बॉय’ बना दिया है।
फ्रीस्टाइल में गोल्ड की ‘हैट्रिक’
नासिक में देश भर के दिग्गज तैराकों के बीच वेद राम ने अपनी चपलता से सबको हैरान कर दिया। उन्होंने तैराकी की सबसे कठिन मानी जाने वाली फ्रीस्टाइल श्रेणी में तीन पदक जीते:
100 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण पदक 🥇
200 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण पदक 🥇
400 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण पदक 🥇
इस स्वर्णिम प्रदर्शन के साथ ही वेद राम ने वर्ल्ड मास्टर गेम्स के लिए क्वालीफाई कर लिया है, जहाँ वे वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
दुकान की जिम्मेदारी और खेल का जुनून
वेद राम की दिनचर्या किसी भी आम युवा के लिए प्रेरणा है। वे लटोरी में ‘वेद प्रिंटिंग’ नाम से एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। दिन भर ग्राहकों की सेवा और छपाई का काम करने के बाद, वे अपना पूरा समय तैराकी के अभ्यास और क्षेत्र के अन्य युवाओं को तराशने में बिताते हैं।
गर्वित हुआ छत्तीसगढ़
उनके पिता श्री होलसायं रजवाड़े और उनके परिवार की आँखों में खुशी के आँसू हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वेद ने साबित कर दिया कि “अगर पंखों में उड़ान हो, तो आसमान छोटा पड़ जाता है।” बलरामपुर और सूरजपुर के खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है और प्रशासन से मांग की जा रही है कि ऐसे होनहार खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए विशेष सहयोग प्रदान किया जाए।
“सीमित संसाधनों में जीती गई यह जंग उन सभी युवाओं के लिए एक कड़ा जवाब है जो सुविधाओं की कमी का बहाना बनाते हैं।”

