
सूरजपुर, 18 मई 2026 सूरजपुर जिले के अंतर्गत तहसील सूरजपुर के केतका में संचालित गायत्री भूमिगत परियोजना (विश्रामपुर एसईसीएल क्षेत्र) के प्रभावितों के लिए एक राहत भरी और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें परियोजना से प्रभावित भूमिस्वामियों और उनके आश्रितों के पुनर्वास और रोजगार से जुड़े संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रभावित परिवारों के हित में कई बड़े फैसले लेते हुए रोजगार और मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर अंतिम सहमति बन गई है।
घटते क्रम में वरीयता सूची के विकल्प पर बनी सहमति
इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्य रूप से ग्राम पोड़ी की अधिग्रहित निजी भूमि से संबंधित भूमिस्वामियों और उनके आश्रितों को कोल इंडिया पुनर्वास नीति 2012 के नियमों के तहत रोजगार उपलब्ध कराने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। नीति के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को रोजगार आवंटन के लिए दो विकल्प दिए गए थे, जिनमें से किसी एक का चयन करना अनिवार्य था।
लंबी चर्चा और आपसी समन्वय के बाद, समिति और प्रभावितों के बीच ‘घटते क्रम में वरीयता सूची’ के विकल्प पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई। समिति के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बैठक में लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय के आधार पर ही अब प्रभावित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को नौकरी देने की आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई को गति दी जाएगी।
तीन गांव हो रहे हैं प्रभावित, कुल 288.209 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित
बैठक में गायत्री भूमिगत परियोजना के भूमि संबंधी तकनीकी आंकड़े भी साझा किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी परियोजना के सुचारू संचालन के लिए कुल 288.209 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इस कुल रकबे में से 220.784 हेक्टेयर हिस्सा पूरी तरह से निजी (किसानों और भू-स्वामियों की) भूमि का है। इस विशाल भूमिगत कोयला परियोजना से मुख्य रूप से सूरजपुर क्षेत्र के तीन ग्रामीण इलाके प्रभावित हो रहे हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं:
जोबगा
गेतरा
पोड़ी
ग्राम पोड़ी का भू-अधिग्रहण और खातेदारों की स्थिति
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रभावित गांवों में से ग्राम पोड़ी में सबसे बड़ा भू-भाग अधिग्रहित हुआ है। यहाँ कुल 128.55 हेक्टेयर (लगभग 317.65 एकड़) निजी भूमि का अधिग्रहण एसईसीएल द्वारा किया गया है।
अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान खातेदारों की संख्या में आंशिक बदलाव भी देखने को मिला। जब शुरुआत में मुआवजे का निर्धारण (कैलकुलेशन) किया जा रहा था, तब इस क्षेत्र में कुल 200 खातेदार दर्ज थे। हालांकि, भूमि अधिग्रहण की आधिकारिक और वास्तविक तिथि के समय तकनीकी रूप से इनकी कुल संख्या 172 खातेदार दर्ज की गई।
29.22 करोड़ का मुआवजा: 187 खातेदारों का भुगतान अब भी शेष
मुआवजे की वित्तीय स्थिति को लेकर बैठक में बताया गया कि ग्राम पोड़ी के प्रभावितों की निजी भूमि के बदले कुल 29.22 करोड़ रुपए की भारी-भरकम मुआवजा राशि निर्धारित की गई है, जो कुल 200 खातेदारों के बीच वितरित की जानी है।
इस राशि के वितरण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने पर पाया गया कि अब तक केवल 13 खातेदारों को ही 1.53 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि का वास्तविक भुगतान किया जा सका है। शेष बचे हुए 187 खातेदारों को 27.69 करोड़ रुपए की बड़ी राशि का भुगतान किया जाना अभी बाकी है। समिति ने इस बकाया राशि के पारदर्शी और त्वरित भुगतान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
कोल इंडिया नीति के तहत 158 परिवारों को मिलेगा सीधा रोजगार
इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि प्रभावितों के लिए रोजगार के प्रावधानों को अंतिम रूप देना रही। अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि की कि कोल इंडिया पुनर्वास नीति 2012 के तहत इस परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए कुल 158 नियमित रोजगार (नौकरी) का कड़ा प्रावधान सुरक्षित किया गया है।
जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति ने पूरी सहानुभूति और नियमों के दायरे में रहकर प्रभावित परिवारों को उनका जायज लाभ दिलाने और क्षेत्र में पुनर्वास प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के तेजी से आगे बढ़ाने पर अपनी अंतिम सहमति व्यक्त की है। समिति के इस रुख से स्थानीय ग्रामीणों और विस्थापितों में अपने भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।