October 12, 2026
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सूरजपुर  : जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय) आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों के अनुसार, यह घटना मार्च-अप्रैल 2025 की है। पीड़िता की माँ ने थाना विश्रामपुर में दर्ज कराई अपनी लिखित शिकायत में पूरी आपबीती बताई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) 2012 की धारा 4 एवं 6 के तहत मामला दर्ज किया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया। इसके बाद चिकित्सीय परीक्षण, पीड़िता व गवाहों के बयान दर्ज करने और अन्य वैज्ञानिक व भौतिक साक्ष्य जुटाने जैसी प्रक्रियाएं पूरी कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई।
मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सजा
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा पत्रावली पर मौजूद प्रमाणों का अनुशीलन करने के बाद दोनों आरोपियों को नाबालिग से दुराचार का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई।
पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित
यह घटना सूरजपुर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल केनापारा फिश पॉइंट के समीप से जुड़ी हुई है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में सैलानी और स्थानीय लोग आते हैं। इस घटना ने सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों पर बच्चों तथा किशोरियों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने, पुलिस गश्त बढ़ाने और अभिभावकों की सजगता की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
समाज और अभिभावकों के लिए न्यायालय का कड़ा संदेश
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराध बेहद गंभीर सामाजिक अपराध हैं और कानून ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की रियायत न देते हुए कठोरतम दंड सुनिश्चित करेगा।
इसके साथ ही, न्यायालय ने माता-पिता और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर संवेदनशील व सतर्क निगाह रखें और उनसे निरंतर संवाद बनाए रखें, ताकि बच्चों को किसी भी अप्रिय घटना या खतरे से समय रहते बचाया जा सके।

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