बुंदिया-करसू मार्ग: पिछले साल फोटो खिंचवाकर वाहवाही लूटने वाले ‘बरसाती मेंढक’ इस बार गायब, लीपापोती की खुली पोल, सड़क की हालत और बदतर

Deshkibaat24
5 Min Read



सूरजपुर :  जिले के ग्राम पंचायत सुदामानगर चुनावी वादे और नेताओं के दावे’ धरातल पर कितने खोखले होते हैं, इसकी बानगी देखनी हो तो बुंदिया से करसू तक जाने वाली 8 किलोमीटर लंबी सड़क पर चले आइए। पिछले साल बरसात के मौसम में जिस सड़क पर डस्ट और गिट्टी फेंककर जनप्रतिनिधियों ने खुद को ‘मसीहा’ साबित करने की होड़ मचाई थी, इस साल वही सड़क गड्डों और दलदल के महासमंदर में तब्दील हो चुकी है। अंतर बस इतना है कि पिछले साल फोटो खिंचवाकर वाहवाही लूटने वाले नेता और प्रतिनिधि इस साल नदारद हैं। ग्रामीणों का सवाल है— क्या नेताओं का फर्ज सिर्फ फोटो खिंचवाने और दिखावे तक ही सीमित था?
📸 पिछले साल की ‘लीपापोती’ और फोटो सेशन का खेल
गौरतलब है कि पिछले वर्ष इसी मौसम में जब सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी थी, तब समाचार माध्यमों में मंत्री प्रतिनिधि और स्थानीय नेताओं के ‘निजी खर्च से सड़क मरम्मत’ कराने की खबरें खूब छपी थीं। गिट्टी की एक ढेरी पर खड़े होकर तस्वीरें खिंचवाई गईं और क्षेत्र में ऐसा माहौल बनाया गया मानो सड़क का कायाकल्प कर दिया गया हो।
परंतु, आज स्थिति देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि वह कार्य केवल आंखों में धूल झोंकने और ‘लीपापोती’ करने वाला स्टंट था। स्थायी निर्माण (डामरीकरण/सीसी रोड) कराने के बजाय केवल डस्ट और घटिया गिट्टी डलवाकर पल्ला झाड़ लिया गया। मानसून की पहली ही बारिश ने उस तथाकथित ‘निजी खर्च वाली मरम्मत’ की धज्जियां उड़ा दी हैं।
🐸 “बरसाती मेंढकों की तरह आए, वाहवाही लूटी और गायब हो गए” — ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस वर्ष सड़क की स्थिति पिछले साल से भी कहीं अधिक बदतर और खतरनाक हो चुकी है। सड़क पर दो-दो फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं जिनमें पानी भरा हुआ है। दुर्घटनाएं रोज की बात हो गई हैं, लेकिन अफसोस कि इस बार उन ‘जनसेवकों’ का कहीं अतापता नहीं है।
ग्राम सुदामानगर, करसू, राजकिशोरनगर और सोनपुर सू के आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है:
तंज और सवाल: “पिछले साल तो नेताजी और उनके प्रतिनिधि कैमरे लेकर आ गए थे कि ‘हम अपने पैसे से बना रहे हैं’। इस साल जब सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है और दलदल बन गई है, तब वे कहाँ छिपे हैं? क्या उनका फर्ज सिर्फ पिछले साल तक ही था?”
बरसाती नेता: ग्रामीणों ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ये नेता ‘बरसाती मेंढकों’ की तरह हैं जो सिर्फ फोटो खिंचवाने और मीडिया में खबरें छपवाने के लिए निकलते हैं। जब धरातल पर काम करने और स्थायी पक्की सड़क बनाने की बारी आती है, तो पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
📌 बजट में मंज़ूरी की ख़बर, फिर भी धरातल पर सन्नाटा
सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी: सूत्रों के हवाले से पता चला है कि यह मार्ग करसू से लक्ष्मीपुर तक आधिकारिक रूप से बजट में जुड़ चुका है। लेकिन बजट स्वीकृति के बावजूद वर्तमान में धरातल पर इस समस्या का कोई निराकरण नहीं किया जा रहा है। कागजों में बजट पास होने के बाद भी ठेकेदार और संबंधित विभाग का दूर-दूर तक अतापता नहीं है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी जस की तस बनी हुई है।
🚨 जिम्मेदारी से भागते जिम्मेदार, कब मिलेगी राहत?
8 किलोमीटर का यह मार्ग हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा है। स्कूली बच्चे, मरीज और राहगीर रोजाना जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।
पिछली बार की गई अस्थायी लीपापोती ने विभाग और शासन-प्रशासन को भी स्थायी निर्माण की जिम्मेदारी से बचने का मौका दे दिया। यदि पिछले साल ढोंग रचने के बजाय शासन से स्वीकृत बजट का काम तुरंत धरातल पर शुरू कराया जाता, तो आज ग्रामीणों को यह दुर्दशा न झेलनी पड़ती।
निष्कर्ष
जनता अब नेताओं के इस ‘फोटो-स्टंट’ और दिखावे के खेल को भली-भांति समझ चुकी है। बुंदिया-करसू मार्ग की यह जर्जर हालत इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सिर्फ डस्ट छिड़ककर और कैमरे के सामने मुस्कुराकर जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री नहीं कर सकते। बजट में शामिल होने के बाद भी यदि काम शुरू नहीं हो रहा है, तो सवाल उठना लाजमी है। देखना यह होगा कि इस तीखे विरोध के बाद सोए हुए प्रतिनिधि और बेपरवाह विभाग की नींद खुलती है या फिर ग्रामीण इस दलदल में फिसलने को ही अपनी नियति मान लेंगे।

Share This Article
Leave a comment