
सूरजपुर : जिले की बुनियादी पुलिसिंग व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुदृढ़, चुस्त-दुरुस्त और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शनिवार, 27 जून 2026 को जिला पंचायत के सभाकक्ष में एक उच्च स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य एजेंडा पुलिस और जनता के बीच आपसी समन्वय को बढ़ाना, अपराधियों पर नकेल कसना तथा आम नागरिकों के भीतर सुरक्षा की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करना था। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिलेभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, राजपत्रित अधिकारी और सभी थाना-चौकी के बीट प्रभारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
सूरजपुर जिले की भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। वर्तमान में जिले के सभी 22 थाना-चौकी क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले कुल 558 ग्रामों और शहरी वार्डों की सुरक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए कुल 70 विशेष बीट का गठन किया गया है। कार्यशाला के दौरान डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर प्रशांत कुमार ठाकुर ने बीट प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यावहारिक संचालन के संबंध में पुलिस रेगुलेशन के कड़े प्रावधानों और पैरा के अनुसार कानून व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस हल्कों और बीट व्यवस्था में दिए गए विधिक व व्यावहारिक निर्देशों को विस्तार से रेखांकित किया।
जनता से सीधा संवाद और गरिमापूर्ण व्यवहार सर्वोपरि
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीआईजी व एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीट प्रणाली हमारी संपूर्ण पुलिस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी रीढ़ है। यह सीधे तौर पर जनता से जुड़ी हुई है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और जवाबदेही सबसे अधिक है। उन्होंने निर्देशित किया कि बीट क्षेत्र में ऐसी त्वरित और विश्वसनीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिसके माध्यम से किसी भी प्रकार की आपातकालीन सूचना, सुरक्षा सावधानी या सरकारी निर्देशों की जानकारी प्रत्येक बीट के अंतिम नागरिक तक तत्काल पहुंचाई जा सके।
उन्होंने बीट प्रभारियों को हिदायत दी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण करें और आम नागरिकों के साथ निरंतर जीवंत संवाद स्थापित करें। जमीनी स्तर पर सक्रिय असामाजिक तत्वों, उपद्रवियों और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी व सटीक निगरानी रखते हुए तुरंत ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र में होने वाले अपराधों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके। डीआईजी ने जोर देकर कहा कि जब पुलिस सुरक्षात्मक रूप से मुस्तैद रहेगी, तभी पुलिस और जनता के बीच आपसी विश्वास और मजबूत हो सकेगा।
सार्वजनिक स्थलों पर लगेंगे पोस्टर
आम जनता की सहूलियत और आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डीआईजी व एसएसपी ने सभी बीट अधिकारियों के नाम और उनके चालू मोबाइल नंबर के बड़े व स्पष्ट पोस्टर गांवों, ग्राम पंचायत भवनों, सार्वजनिक चौराहों और वार्डों में अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए हैं। इससे आमजन अपनी समस्याओं और शिकायतों को बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे पुलिस के संज्ञान में ला सकेंगे।
व्यवहार में विनम्रता और व्यावसायिकता आवश्यक
वरिष्ठ पुलिस कप्तान ने विशेष तौर पर अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि थाने या बीट स्तर पर आने वाले पीड़ित और आम जनता की शिकायतों को अत्यंत नम्रतापूर्वक और धैर्य के साथ सुना जाना चाहिए। पुलिस का व्यवहार पूरी तरह से पेशेवर (प्रोफेशनल) और गरिमापूर्ण होना चाहिए। जनता के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बीट प्रणाली के तहत केवल अपराध रोकना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि महिला सुरक्षा सुनिश्चित करना, असहाय बुजुर्गों की त्वरित मदद करना और युवाओं को नशे व अपराध के खिलाफ जागरूक करना भी बीट पुलिसिंग का एक अनिवार्य हिस्सा है।
बीट प्रभारियों की जवाबदेही तय, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
कार्यशाला में बीट प्रभारियों की जवाबदेही और उनके कर्तव्यों का नए सिरे से निर्धारण किया गया। अब से बीट क्षेत्र के भीतर होने वाली प्रत्येक छोटी-बड़ी गतिविधि, कानून व्यवस्था की स्थिति और अपराधों की रोकथाम की सीधी जिम्मेदारी संबंधित बीट प्रभारी की होगी। उन्हें अपने क्षेत्र के पुराने अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों, वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले तत्वों की एक अद्यतन (अपडेटेड) सूची हमेशा अपने पास रखनी होगी और उनकी दैनिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी होगी।
प्रसार और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि बीट प्रभारी और उनके अधीनस्थ कर्मचारी जब भी बीट भ्रमण पर जाएंगे, तो उन्होंने क्षेत्र में क्या देखा, किस गणमान्य या आम नागरिक से मुलाकात की और क्या निवारक कार्रवाई की, इसकी विस्तृत दैनिक रिपोर्ट हर रोज संबंधित थाना प्रभारी को सौंपनी होगी। इस पूरे ब्योरे का विधिवत संधारण ‘बीट बुक’ में किया जाएगा। इस व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक माह संबंधित अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) स्वयं इन बीट बुक्स की बारीकी से जांच करेंगे और प्रगति की समीक्षा करेंगे।
महिला सुरक्षा पर पुलिस का विशेष पहरा
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कार्यशाला में विशेष कार्ययोजना तैयार की गई। बीट प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे अपने क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों के आस-पास महिला सुरक्षा के लिहाज से विशेष और सघन निगरानी रखें। इसके साथ ही, ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों, साप्ताहिक हाट-बाजारों तथा महिला स्व-सहायता समूहों के आयोजनों के दौरान पुलिस अधिकारी स्वयं उपस्थित होकर महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं और पुलिस सहायता नंबरों के बारे में विस्तार से जागरूक करेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय कार्यशाला के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए जिले के आला अधिकारियों ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश साझा किए। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन, सीएसपी बेनार्ड कुजूर, डीएसपी मुख्यालय महालक्ष्मी कुलदीप, एसडीओपी ओड़गी राजेश जोशी, एसडीओपी सूरजपुर अभिषेक पैंकरा, डीएसपी अजाक रीना नीलम कुजूर, डीएसपी अनूप एक्का सहित जिले के सभी थाना-चौकी प्रभारी और बड़ी संख्या में बीट प्रभारी व पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।