खरीफ सीजन के लिए खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों को नहीं होगी परेशानी

सूरजपुर : खरीफ सीजन को देखते हुए प्रतापपुर विकासखंड में किसानों के लिए खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सहकारी समितियों तथा निजी विक्रय केंद्रों में उर्वरक और बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
               कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखंड की 9 सहकारी समितियों—प्रतापपुर, सोनगरा, कोटेया, जगन्नाथपुर, टुकुडांड, रेवटी, गोविंदपुर, दवनकरा एवं चंदौरा में अब तक यूरिया 1724 मीट्रिक टन, सिंगल सुपर फास्फेट 314 मीट्रिक टन, म्यूरेट ऑफ पोटाश 231 मीट्रिक टन, डीएपी 854 मीट्रिक टन, एनपीके 12:32:16 के 715 मीट्रिक टन तथा एनपीके 20:20:0:13 के 1161 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इनका वितरण शासन की गाइडलाइन के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किया जा रहा है।
वर्तमान में भी समितियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। इनमें यूरिया 451 मीट्रिक टन, सिंगल सुपर फास्फेट 241 मीट्रिक टन, म्यूरेट ऑफ पोटाश 114 मीट्रिक टन, डीएपी 541 मीट्रिक टन, एनपीके 12:32:16 के 294 मीट्रिक टन तथा एनपीके 20:20:0:13 के 516 मीट्रिक टन का भंडारण है। इसके अतिरिक्त प्रतापपुर डबल लॉक केंद्र में 1040.15 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है।
               धान बीज का वितरण भी लगातार जारी है। अब तक सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को 303 क्विंटल धान बीज वितरित किया जा चुका है। सभी समितियों में बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा मांग के अनुरूप अतिरिक्त बीज की व्यवस्था भी की जा रही है।
किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है। डबल लॉक केंद्र, सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों से बीज एवं उर्वरक के नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण कराया जा रहा है। अब तक 40 नमूनों को जांच के लिए भेजा जा चुका है। वहीं कृषि विभाग की निगरानी टीम निजी विक्रय केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर रही है तथा उर्वरकों की दर सूची एवं स्टॉक की जानकारी विक्रय केंद्रों में प्रदर्शित कराई गई है।
           कृषि विभाग द्वारा किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को जैविक खाद, हरी खाद, नील हरित शैवाल, नैनो उर्वरक एवं प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने के लिए लगातार प्रेरित एवं प्रशिक्षित किया जा रहा है।
            कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आवश्यकतानुसार खाद एवं बीज का उठाव करें तथा किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित सहकारी समिति या कृषि विभाग से संपर्क करें।

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