October 11, 2026
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सूरजपुर : भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जनगणना-2027 के प्रथम चरण ‘मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना’ का कार्य सूरजपुर जिले में अपनी पूरी गति पर है। 01 मई से शुरू हुआ यह अभियान 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। जिला प्रशासन की सक्रियता और डिजिटल तकनीक के सटीक समन्वय के कारण जिले ने अब तक निर्धारित लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
प्रशासनिक ढांचा और मैदानी मुस्तैदी
जनगणना कार्य को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए जिले को विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित कर 16 चार्ज अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण अंचलों की कमान 09 तहसीलदारों को सौंपी गई है, जिनमें सूरजपुर, लटोरी, भैयाथान, ओड़गी, बिहारपुर, भटगांव, रामानुजनगर, प्रेमनगर एवं प्रतापपुर शामिल हैं।
शहरी क्षेत्र: नगरीय निकायों के सुचारू सर्वेक्षण हेतु 07 मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें नगर पालिका परिषद सूरजपुर सहित नगर पंचायत बिश्रामपुर, शिवनंदनपुर, भटगांव, प्रेमनगर, प्रतापपुर एवं जरही के अधिकारी सम्मिलित हैं।
मैदानी स्तर पर आंकड़ों के संकलन के लिए 1,550 प्रगणक और 269 पर्यवेक्षक (रिजर्व दल सहित) घर-घर पहुंच रहे हैं। इन सभी को 33 फील्ड ट्रेनर्स द्वारा गहन तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है।
डिजिटल जनगणना: पारदर्शिता और सटीकता
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः डिजिटल होना है। भारत सरकार द्वारा विकसित विशेष मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से प्रगणक सीधे मौके पर ही जानकारी दर्ज कर रहे हैं। इससे न केवल कागजी कार्यवाही कम हुई है, बल्कि आंकड़ों का संकलन त्वरित, पारदर्शी और त्रुटिरहित सुनिश्चित हो रहा है।
अब तक की उपलब्धियां
10 मई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, जिले की प्रगति उत्साहजनक है:
कुल जनगणना ब्लॉक: 1,433
पूर्ण किए गए ब्लॉक: 246
गणित मकानों की संख्या: 2,29,765 (अनुमानित 2,23,484 भवनों के विरुद्ध)
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जिला प्रशासन और प्रगणकों की टीम निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्यरत है।
जन-जागरूकता हेतु बहुआयामी अभियान
प्रशासन द्वारा ‘कोई भी मकान न छूटे’ के संकल्प के साथ व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
एल.ई.डी. वैन: 13 से 15 मई तक जनगणना कार्य निर्देशालय रायपुर द्वारा भेजी गई विशेष वैन जिले के हाट-बाजारों और मेलों में नागरिकों को जागरूक करेगी।
स्थानीय माध्यम: कोटवारों द्वारा मुनादी, दीवार लेखन, और नगरीय निकायों के ऑटो-टिपर के माध्यम से संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।
सांस्कृतिक माध्यम: ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटकों और ग्राम सभाओं के माध्यम से जनगणना के महत्व को समझाया जा रहा है।

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