
अम्बिकापुर, : जिले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में आज सर्किट हाउस अम्बिकापुर में अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों एवं प्रबुद्ध सदस्यों के साथ एक उच्च स्तरीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विस्तृत संवाद के दौरान क्षेत्र के जनजातीय समाज की समस्याओं, प्रशासनिक चुनौतियों और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। डॉ. आशा लकड़ा ने आयोग के अधिकारों, कर्तव्यों और जनजातीय हितों के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम में सरगुजा संभाग के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और सामाजिक नेतृत्व ने हिस्सा लिया। बैठक में मुख्य रूप से रामकुमार टोप्पो (विधायक, सीतापुर), प्रबोध मिंज (विधायक, लुण्ड्रा), निरूपमा सिंह (अध्यक्ष, जिला पंचायत) तथा रामकिसुन सिंह (अध्यक्ष, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अम्बिकापुर) उपस्थित रहे। साथ ही, पूर्व सरगुजा सांसद कमलभान सिंह ने भी चर्चा में भाग लिया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रतिनिधिमंडल से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से पुरूनेन्दु कांत, पी.के.दास, सोनल राज, एच.आर.मीना, जे.पी.सिंह तथा कुलेश्वर साहू के नाम प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त जनजातीय समाज के विभिन्न सामाजिक घटकों के प्रमुख, समाज प्रमुख, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी समुदाय के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से पटल पर रखा।
संवैधानिक अधिकारों एवं सामाजिक उत्थान पर केंद्रित रहा उद्बोधन
संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. आशा लकड़ा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के व्यापक अधिकारों, कर्तव्यों और कार्यप्रणाली के विषय में विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि आयोग देश के सुदूर अंचलों में निवासरत अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक कवच के रूप में कार्य करता है। उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को गति देना आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल है।
डॉ. आशा लकड़ा ने उपस्थित समाज प्रमुखों और प्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे बिना किसी संकोच के अपने क्षेत्र की वास्तविक जमीनी समस्याओं, प्रशासनिक बाधाओं और मांगों को विस्तारपूर्वक साझा करें, ताकि उन पर प्रभावी और त्वरित नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
जनजातीय प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए प्रमुख ज्वलंत मुद्दे और मांगें
आयोग के समक्ष क्षेत्र के सामाजिक प्रतिनिधियों ने सरगुजा अंचल की भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों को प्रस्तुत किया। इन प्रमुख मांगों और समस्याओं का विवरण इस प्रकार है:
बुनियादी ढांचा और सिंचाई: क्षेत्र के सुदूर ग्रामीण अंचलों में बारहमासी सड़कों के निर्माण की आवश्यकता जताई गई। इसके साथ ही, काफी समय से क्षतिग्रस्त पड़े स्थानीय बांधों की तत्काल मरम्मत और जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया गया ताकि किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके।
जनजातीय भूमि का संरक्षण और खनन मुआवजा: औद्योगिकीकरण और विकास योजनाओं के नाम पर जनजातीय भूमि के अवैध हस्तांतरण को रोकने और कड़े भू-संरक्षण नियमों को लागू करने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त, बॉक्साईट खनन प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों के लिए न्यायसंगत, पारदर्शी और उचित मुआवजे के साथ-साथ उनके पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
जाति प्रमाण पत्र की जटिलताएं: स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को अपनी पहचान और संवैधानिक लाभ प्राप्त करने के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी विसंगतियों से आयोग को अवगत कराया गया और इसके सरलीकरण की मांग की गई।
विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा: सरगुजा अंचल में निवासरत कोरवा एवं पंडो अनुसूचित जनजाति के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) की श्रेणी में शामिल करने और उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं संचालित करने की पुरजोर मांग उठाई गई।
मानव-हाथी द्वंद्व की समस्या: सरगुजा और आसपास के वनांचल क्षेत्रों में हाथियों के विचरण से होने वाले जान-माल, फसलों और मकानों के नुकसान की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों ने इसके स्थायी समाधान और प्रभावितों को त्वरित व पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की।
सांस्कृतिक धरोहर एवं महानायकों का सम्मान: आदिवासियों की आस्था के केंद्र ‘सरना स्थलों’ के संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए विशेष बजटीय प्रावधान करने की मांग की गई। इसके साथ ही, अम्बिकापुर शहर के प्रमुख सार्वजनिक चौराहों पर आदिवासी समाज के अमर सेनानियों—भगवान बिरसा मुण्डा, सिद्धू एवं कान्हू सहित अन्य आदिवासी महानायकों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।
शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रावास की आवश्यकता: अम्बिकापुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में दूर-दराज के वनांचल क्षेत्रों से आने वाले जनजातीय विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त और सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल एवं छात्रावासों के निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई।
पांचवी अनुसूची और शहरी क्षेत्रों में आरक्षण लाभ: चूंकि सरगुजा संपूर्ण रूप से पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है, इसलिए प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले जनजातीय समुदाय को भी ग्रामीण क्षेत्रों के समान ही सभी बुनियादी सुविधाएं, विकास योजनाएं और आरक्षण संबंधी लाभ बिना किसी भेदभाव के मिलने चाहिए।
आयोग का आश्वासन: प्राथमिकता के आधार पर होगी त्वरित कार्रवाई
संवाद के समापन सत्र में सभी विषयों को सुनने के पश्चात डॉ. आशा लकड़ा ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों को आश्वस्त किया कि इस संवाद कार्यक्रम के दौरान प्राप्त हुए सभी सुझावों, मांगों और गंभीर शिकायतों को आयोग ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ संज्ञान में लिया है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा:
“संवाद के दौरान सामने आए सभी मुद्दों का वर्गीकरण कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों, राज्य शासन और केंद्र सरकार के स्तर पर प्रेषित किया जाएगा। आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा कि इन समस्याओं पर समयबद्ध और न्यायसंगत प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।”
बैठक के अंत में स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के इस क्षेत्रीय प्रवास और जीवंत संवाद के लिए आभार व्यक्त किया गया।