विशेष संवादाता मोहम्मद रिजवान
बलरामपुर : कुसमी जिला बलरामपुर रामानुजगंज अंतर्गत आने वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित कुसमी एक बार फिर गंभीर विवादों और सुर्खियों के केंद्र में आ गई है। यह वही सहकारी समिति है जो पूर्व में किसानों के नाम पर कथित रूप से करोड़ों रुपये का फर्जी ऋण (लोन) निकालने के मामले को लेकर विवादों में घिरी हुई थी। अब इस समिति पर खाद्य वितरण व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का आरोप है कि समिति द्वारा उन्हें खेतों में उपयोग के अनुपयुक्त, पत्थर जैसे कड़े और ढेला नुमा (गांठ बनी हुई) खाद का वितरण किया जा रहा है। जब किसानों ने इसका विरोध किया, तो समिति के कर्मचारियों द्वारा उनके साथ अभद्र व तानाशाही व्यवहार किया गया। इसके साथ ही, टोकन जारी करने और शेयर के नाम पर किसानों से बिना किसी वैध रसीद के अवैध रूप से मोटी नगद राशि वसूलने जैसे कई संगीन आरोप भी सामने आए हैं।
पुराना फर्जी ऋण घोटाला आज भी बना है किसानों के लिए जी का जंजाल
गौरतलब है कि इसी कुसमी समिति में पूर्व में किसानों के नाम पर कथित रूप से करोड़ों रुपये के फर्जी ऋण आहरण का एक बड़ा मामला उजागर हुआ था। उस दौरान क्षेत्र के कई पीड़ित किसानों ने खुलकर सामने आते हुए यह दावा किया था कि उन्होंने समिति से कभी किसी प्रकार का कोई कर्ज या ऋण लिया ही नहीं है, इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड में उनके नाम पर लाखों रुपये का कर्ज दर्ज मिला।
किसानों का कहना है कि उस पुराने घोटाले का दंश वे आज भी भुगत रहे हैं। वर्तमान समय में भी कई निर्दोष किसानों के बैंक खाते पूरी तरह से ‘होल्ड’ (फ्रीज) पड़े हुए हैं। खाते बंद होने की वजह से किसानों को शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने, अनुदान राशि प्राप्त करने और धान खरीदी का बोनस उठाने में भारी मानसिक व आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पुराने विवाद का अभी पूरी तरह से निपटारा भी नहीं हो पाया था कि इसी बीच खाद वितरण को लेकर सामने आए इन नए आरोपों ने समिति की संपूर्ण कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और नियत पर एक बार फिर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
घटिया एवं ढेला नुमा खाद लेने के लिए विवश हो रहे किसान
वर्तमान समय कृषि कार्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील है, जहां फसलों के लिए समय पर सही खाद की सख्त जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में ग्राम लैक्रिमा के निवासी अजीत कुमार, महादेव राम, श्याम धन, ग्राम पड़ीपा के दयाल राम तथा ग्राम सिविल दाग के राजकुमार सहित भारी संख्या में उपस्थित अन्य किसानों ने मीडिया के सामने आकर अपना दर्द और आक्रोश व्यक्त किया।
किसानों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जब वे खाद लेने के लिए समिति के मुख्य गोदाम पर पहुंचे, तो उन्हें ऐसी खाद की बोरियां थमाई जा रही थीं जिसमें खाद पूरी तरह से ढेला नुमा हो चुकी थी और उसमें बड़े-बड़े सख्त पत्थर जैसी गांठे बन चुकी थीं। किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने इस खराब और ढेलेदार खाद को बदलने की मांग की और इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया, तो वहां मौजूद स्टाफ ने उनके साथ बेहद अभद्र और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया। किसानों को सीधे शब्दों में दो टूक कह दिया गया कि “अगर खाद लेना है तो यही लो, और नहीं लेना है तो मत लो, यहां से जाओ।” खेती के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है, जिसके कारण उन्हें मजबूरी वश ऐसी घटिया खाद लेने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
शेयर के नाम पर अवैध नगद वसूली, नहीं दी जा रही कोई रसीद
मामला सिर्फ खराब खाद वितरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि किसानों ने समिति पर आर्थिक शोषण करने का भी आरोप लगाया है। किसानों के अनुसार, खाद वितरण के लिए अनिवार्य टोकन जारी करने से पहले समिति द्वारा उनसे ‘शेयर’ के नाम पर अलग-अलग अवैध राशियों की मांग की जा रही है। किसी किसान से ₹1000 वसूले जा रहे हैं, तो किसी से उसकी जोत के हिसाब से कम या अधिक राशि की नगद मांग की जा रही है।
पीड़ित किसानों का कहना है कि वहां उपस्थित अधिकांश सीधे-साधे ग्रामीण लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि यह राशि किस सरकारी नियम या किस प्रावधान के तहत ली जा रही है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी रकम जमा कराने के बाद भी किसानों को संस्था की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक कंप्यूटर जनित या हाथ से लिखी हुई रसीद (पावती) नहीं दी जा रही है। अधिकारियों द्वारा केवल एक साधारण रफ रजिस्टर में किसान का नाम और उसके द्वारा जमा की गई नगद राशि को अपने पास दर्ज कर के रख लिया जा रहा है, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
जिम्मेदारों के बयान: जवाबदेही से पल्ला झाड़ते आए नजर
इस पूरे घटनाक्रम और किसानों के गंभीर आरोपों को लेकर जब मौके पर मौजूद जिम्मेदार कर्मचारियों और प्रबंधकों से बात की गई, तो उनका रवैया पूरी तरह से टालमटोल वाला रहा। मौके पर मौजूद समिति के भृत्य महेंद्र कुमार सिंह ने अत्यंत सीमित जानकारी होने का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में गोदाम के भीतर जो भी खाद उपलब्ध कराई गई है, वही किसानों को वितरित की जा रही है। खाद के बोरे के अंदर ढेला क्यों बन गया या वह इतनी खराब क्यों हो गई, इसके तकनीकी कारणों के बारे में वे कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हैं।
वहीं दूसरी ओर, सेमरा स्थित मुख्य गोदाम में खाद वितरण का कार्य संभाल रहे जवाहर नगर समिति के प्रबंधक सूरज प्रसाद ने इस मामले में नया मोड़ देते हुए बताया कि वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे स्वयं कुसमी समिति के मुख्य प्रबंधक कमलेश पैरा के सीधे निर्देशों और आदेशों पर ही यहां खाद का वितरण कार्य देख रहे हैं। खाद के ढेला नुमा होने के सवाल पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि हो सकता है कि यह खाद गोदाम में बहुत लंबे समय तक डंप रही हो या सही तरीके से भंडारित न की गई हो, जिसके कारण उसमें नमी आ गई और गांठे बन गईं। हालांकि, जब उनसे किसानों से ‘शेयर’ के नाम पर ली जा रही नगद राशि और बिना रसीद के हो रही वसूली के संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने पूरी तरह अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकार के किसी भी वित्तीय लेनदेन या वसूली की कोई जानकारी नहीं है।
मुख्य प्रबंधक ने साधी चुप्पी, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
इस संपूर्ण संवेदनशील मामले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति कुसमी के मुख्य प्रबंधक कमलेश पैरा का आधिकारिक पक्ष और स्पष्टीकरण जानने के लिए मीडिया तथा संवाददाताओं द्वारा उनके व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर कई बार संपर्क करने का लगातार प्रयास किया गया। परंतु हर बार मुख्य प्रबंधक द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया और उन्होंने इस विषय पर अपनी कोई भी प्रतिक्रिया देने से साफ किनारा कर लिया। प्रबंधक का फोन न उठाना और सामने आकर स्पष्टीकरण न देना उनके दायित्वों के प्रति संदेहास्पद रवैये को दर्शाता है, जिसके कारण उनका पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जा सका।
समिति के इस तानाशाही और भ्रष्ट रवैये से तंग आकर अब क्षेत्र के आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों तथा राज्य शासन से खाद वितरण व्यवस्था में चल रही इस धांधली तथा शेयर के नाम पर की जा रही अवैध राशि वसूली के पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच में उनके द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले और शासकीय पदों का दुरुपयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त से सख्त दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसानों का आर्थिक व मानसिक शोषण रोका जा सके।