October 12, 2026
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सूरजपुर :  छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राज्य में उद्यानिकी फसलों के संरक्षण हेतु ‘पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना’ के अंतर्गत मौसम खरीफ वर्ष 2026-27 के सफल क्रियान्वयन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। सूरजपुर जिले में इस योजना के तहत प्रमुख उद्यानिकी फसलों को शामिल किया गया है, जिसके लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य मौसम की अनिश्चितताओं से होने वाले वित्तीय नुकसान से कृषकों को सुरक्षा प्रदान करना है।
प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, योजना के सुचारू संचालन और वास्तविक धरातल पर क्रियान्वयन के लिए राजस्व निरीक्षक मंडल (आर.आई. सर्कल) को मूल बीमा इकाई के रूप में घोषित किया गया है। जिले में खेती करने वाले सभी वर्ग के कृषकों को उनकी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासन ने ऋणमान (बीमित राशि) का केवल 5 प्रतिशत प्रीमियम के रूप में भुगतान करने का प्रावधान किया है, जबकि शेष प्रीमियम का वहन सरकार द्वारा अनुदान के रूप में किया जाएगा।
अधिसूचित उद्यानिकी फसलें एवं निर्धारित वित्तीय संरचना
सूरजपुर जिले के लिए जारी अधिसूचना में कुल सात प्रमुख उद्यानिकी फसलों को बीमित करने की पात्रता दी गई है। प्रत्येक फसल के लिए प्रति हेक्टेयर बीमित राशि और कृषक द्वारा देय 5 प्रतिशत प्रीमियम की दरें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं, जिनका विवरण निम्नानुसार है:
अदरक: कुल बीमित राशि ₹ 1,50,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 7,500
टमाटर: कुल बीमित राशि ₹ 1,20,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 6,000
पपीता: कुल बीमित राशि ₹ 87,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 4,350
केला: कुल बीमित राशि ₹ 85,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 4,250
बैगन: कुल बीमित राशि ₹ 77,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 3,850
मिर्च: कुल बीमित राशि ₹ 68,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 3,400
अमरूद: कुल बीमित राशि ₹ 45,000 (प्रति हेक्टेयर) | कृषक प्रीमियम अंश (5%) — ₹ 2,250
जोखिम अवधि एवं स्वचालित मौसम केंद्र द्वारा नुकसान का सटीक आकलन
अधिसूचना के अनुसार, इन सभी नामांकित उद्यानिकी फसलों के लिए जोखिम अवधि 1 मार्च 2026 से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस विस्तृत समयावधि के दौरान यदि मौसम में किसी भी प्रकार का प्रतिकूल बदलाव आता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है, तो उसका पूर्ण आकलन किया जाएगा।
बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं के दायरे को व्यापक बनाया गया है। इसमें मुख्य रूप से अत्यधिक वर्षा, अल्प वर्षा (सूखा जैसी स्थिति), बेमौसम बारिश, अत्यधिक उच्च तापमान, अत्यधिक निम्न तापमान (शीतलहर), बीमारियों के फैलने के लिए अनुकूल मौसम और तीव्र वायु गति के कारण फसलों को होने वाली क्षति को शामिल किया गया है। नुकसान के निष्पक्ष और वैज्ञानिक मापन के लिए जिले में स्थापित स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) द्वारा दर्ज आंकड़ों को ही एकमात्र आधार माना जावेगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
📢 स्थानीय आपदा ओलावृष्टि की स्थिति में विशेष प्रावधान:
यदि किसी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर ओलावृष्टि होती है, तो प्रभावित कृषक को त्वरित राहत प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। ऐसी स्थिति में किसान को क्षति के 72 घंटों के भीतर सीधे बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1800-419-0344 पर शिकायत दर्ज करानी होगी। इसके अतिरिक्त, किसान बीमित फसल के पूर्ण विवरण, क्षति की अनुमानित मात्रा तथा नुकसान के स्पष्ट कारण का उल्लेख करते हुए संबंधित बैंक, स्थानीय उद्यानिकी विभाग या जिला अधिकारी को लिखित रूप में भी आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
पंजीकरण की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
जिले के सभी ऋणी एवं अऋणी कृषक जो इन उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे हैं, वे 31 जुलाई 2026 तक अपना नामांकन सुनिश्चित कर सकते हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाते हुए इसे लोक सेवा केंद्रों (सीएससी), संबंधित बैंक शाखाओं और सहकारी समितियों के माध्यम से पूर्ण करने की अनुमति दी गई है।
ऋणी कृषक: जिन किसानों ने बैंक या सहकारी समितियों से कृषि ऋण प्राप्त किया है, वे अपनी संबंधित सहकारी, ग्रामीण अथवा वाणिज्यिक बैंक शाखाओं से तत्काल संपर्क कर अपने अनिवार्य नामांकन की जांच व पुष्टि करा सकते हैं।
अऋणी कृषक: स्वेच्छा से बीमा कराने वाले गैर-ऋणी किसानों को आवेदन के साथ भूमि का प्रामाणिक नक्शा, खसरा विवरण, बैंक पासबुक की स्पष्ट छायाप्रति तथा वास्तविक क्षेत्र बुवाई प्रमाण पत्र अथवा बुवाई के आशय का स्वघोषणा पत्र संलग्न करना होगा। ध्यान रहे कि यह घोषणा पत्र क्षेत्रीय राजस्व अधिकारी या ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी द्वारा सत्यापित होना अनिवार्य है।
प्रशासनिक व्यवस्था एवं संपर्क सूत्र
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सूरजपुर जिले में इस पूरी फसल बीमा योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन और दावों के निपटारे हेतु ‘एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ (AIC) को अधिकृत संस्थान नियुक्त किया गया है। योजना का लाभ उठाने के इच्छुक किसान या किसी भी प्रकार की तकनीकी कठिनाई का सामना कर रहे लोग विस्तृत जानकारी के लिए सहायक संचालक उद्यान कार्यालय सूरजपुर अथवा अपने विकासखंड के मैदानी क्षेत्रों में पदस्थ उद्यान विकास अधिकारियों से सीधे संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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