सूरजपुर के ग्राम सोहागपुर में रेत माफियाओं का बेखौफ खेल: एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां, स्कूली बच्चों की जान खतरे में

Deshkibaat24
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मोहिबुल हसन (लोलो)

सूरजपुर :  जिले के ग्राम सोहागपुर एवं रूनियाडीह में रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि शासन-प्रशासन के कड़े नियमों को दरकिनार कर खुलेआम अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खेल जारी है। 15 जून से मानसून सत्र के दौरान नदियों से रेत निकालने पर शासन और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्पष्ट रोक के बावजूद, यहाँ चौबीसों घंटे तेज रफ्तार टिपरों के माध्यम से रेत अंबिकापुर की ओर खपाया जा रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी और सांठगांठ पर उठते सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध कारोबार को लेकर माइनिंग (खनन) विभाग को कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद खनन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि खनन अधिकारियों और रेत माफियाओं के बीच की पुरानी साठगांठ के कारण माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।
इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस थाना व चौकी क्षेत्र में दिन-रात तेज रफ्तार रेत से भरे टिपर फर्राटा भर रहे हैं। 24 घंटे जारी इस अवैध परिवहन को देखकर ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और माफियाओं की मिलीभगत के चलते ही यह अवैध कारोबार बिना किसी डर के फल-फूल रहा है।
मासूम बच्चों और राहगीरों की जिंदगी से खिलवाड़
सबसे दुखद और चिंताजनक पहलू यह है कि यह अवैध परिवहन ठीक स्कूली समय के दौरान तेज रफ्तार से किया जा रहा है। सड़कों पर दौड़ते इन अनियंत्रित टिपरों से उड़ने वाली धूल और रेत के छोटे-छोटे कंकड़ सीधे राहगीरों और स्कूल आते-जाते मासूम बच्चों की आंखों में पड़ रहे हैं।
हादसों की आशंका: आंखों में रेत जाने से बाइक और साइकिल सवारों का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
पुराना खूनी इतिहास: ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी इन्हीं बेलगाम रेत गाड़ियो की चपेट में आने से दो लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन ने न तो गाड़ियों की रफ्तार पर अंकुश लगाया और न ही समय-सीमा का निर्धारण किया।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
ग्राम सोहागपुर व रूनियाडीह के निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस अवैध कारोबार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लगाया और दोषी माफियाओं व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को विवश होंगे।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में सूरजपुर कलेक्टर और जिला पुलिस प्रशासन कब तक संज्ञान लेकर रेत माफियाओं पर नकेल कसता है, या फिर मासूम स्कूली बच्चे और ग्रामीण यूं ही माफियाओं की मनमानी का शिकार होते रहेंगे।

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