सूरजपुर : स्वच्छता पखवाड़ा के दूसरे दिन ‘हरित विद्यालय दिवस’ के अवसर पर सूरजपुर जिले के विद्यालय में एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को जल संरक्षण, जल संकट, एकल-उपयोग प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) के दुष्प्रभावों तथा पर्यावरण स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। कार्यशाला में शिक्षकों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण सुरक्षा में छोटी-छोटी आदतों के महत्व को समझा।
जल संरक्षण पर विस्तृत चर्चा
कार्यशाला में विशेष रूप से जल संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि पानी एक सीमित और मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है। इसका दुरुपयोग भविष्य में गंभीर जल संकट का कारण बन सकता है। जल बचाने के लिए नल को अनावश्यक रूप से खुला न छोड़ने, आवश्यकता के अनुसार ही पानी का उपयोग करने और वर्षाजल संचयन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) जैसे तरीकों को अपनाने की सलाह दी गई।
रोचक व्यावहारिक गतिविधि से समझी पानी की कीमत
जल की बर्बादी को व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए बच्चों से एक अनूठी गतिविधि कराई गई।
सबसे पहले बच्चों से केवल एक गिलास पानी से हाथ धोने का प्रयास करने को कहा गया और पूछा गया कि क्या इतने पानी में हाथ पूरी तरह साफ हो सकते हैं।
इसके बाद, 30 सेकंड के लिए नल को लगातार खुला छोड़कर बहने वाले पानी को एक बाल्टी में जमा किया गया।
बच्चों ने जब आवश्यकता अनुसार इस्तेमाल होने वाले पानी और व्यर्थ बहे पानी की मात्रा की तुलना की, तो वे हैरान रह गए। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्वयं महसूस किया कि नल को थोड़ी देर भी खुला छोड़ने से कितना अधिक पानी बर्बाद हो जाता है। इसके बाद बच्चों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और जल बचाने के नए-नए उपाय भी साझा किए।
सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करने की अपील
कार्यशाला में एकल-उपयोग (सिंगल यूज) प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को कपड़े या अन्य पुनः उपयोग योग्य थैलों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, विद्यालय परिसर और अपने घर के आसपास की स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प भी दिलाया गया।