
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ — कृषि विभाग द्वारा जिले के प्रतापपुर विकासखंड में एग्रीस्टैक (AgriStack) कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए एक विशेष पहल की शुरुआत की गई है। कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर, उप संचालक कृषि संपदा पैकरा और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी शिव शंकर यादव के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की मैदानी टीम किसानों के घरों और खेतों तक पहुंचकर फॉर्मर आईडी (Farmer ID) बनाने और भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण के काम में जुटी हुई है।
🚜 घर-घर और खेतों तक क्यों पहुंच रही है टीम?
वर्तमान समय में खरीफ फसल का सीजन चल रहा है। अधिकांश किसान खेतों में बुआई, रोपाई और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं। इस वजह से वे सीएससी (CSC) केंद्रों या कृषि कार्यालयों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों की इस व्यावहारिक समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने फैसला लिया कि अमला स्वयं किसानों के पास पहुंचेगा।
इसी क्रम में हाल ही में ग्राम पंचायत सकलपुर और श्यामनगर में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अभिषेक सिंह के नेतृत्व में सीएससी संचालक माखन प्रजापति के सहयोग से किसानों के घर-घर और खेतों तक पहुंचकर एग्रीस्टैक से संबंधित प्रक्रिया को मौके पर ही पूरा कराया गया।
🎯 फॉर्मर आईडी क्यों है बेहद जरूरी?
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की सभी किसान-हितैषी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता से प्रदान करने के लिए फॉर्मर आईडी अनिवार्य की जा रही है।
निकट भविष्य में निम्नलिखित योजनाओं का लाभ इसी डिजिटल पहचान (फॉर्मर आईडी) के माध्यम से दिया जाएगा:
धान खरीदी प्रक्रिया (न्यूनतम समर्थन मूल्य पर)
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan)
राज्य व केंद्र सरकार की अन्य कृषि सब्सिडी और योजनाएं
🌐 एग्रीस्टैक का मुख्य उद्देश्य
एग्रीस्टैक अभियान का प्राथमिक उद्देश्य प्रत्येक किसान की कृषि भूमि को उसके आधार कार्ड से ऑनलाइन जोड़ना और कृषि संबंधी सभी अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण करना है।
इस प्रक्रिया से होने वाले प्रमुख लाभ:
पारदर्शिता: सरकारी योजनाओं की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे और पारदर्शी तरीके से पात्र किसानों तक पहुंचेगी।
समय की बचत: योजनाओं का लाभ मिलने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
भूमि विवादों का समाधान: भविष्य में भूमि और खसरा से जुड़ी समस्याओं का निपटारा और सत्यापन आसान होगा।
💡 किसानों के लिए आवश्यक जानकारी:
एग्रीस्टैक और फॉर्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया के दौरान किसान अपना आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज (खसरा/बी-1) और आधार से लिंक मोबाइल नंबर अपने पास रखें ताकि मैदानी अधिकारी या सीएससी प्रतिनिधि तत्काल उनका पंजीयन पूर्ण कर सकें।

