स्कूली बच्चों को साइबर अपराधों से बचाने सरगुजा पुलिस की पहल: पुलिस लाइन स्कूल में लगा जागरूकता शिविर

Deshkibaat24
5 Min Read

अंबिकापुर : सरगुजा जिले में आज की डिजिटल दुनिया में इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग जितनी तेजी से बढ़ा है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध के मामले भी सामने आ रहे हैं। साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इन्हीं खतरों से विद्यार्थियों को सुरक्षित रखने और उन्हें जागरूक नागरिक बनाने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस द्वारा एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुलिस लाइन अंबिकापुर में आयोजित हुआ।
पुलिस प्रशासन के निर्देशन में हुआ आयोजन
यह पूरा जागरूकता अभियान डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के दिशा-निर्देशन में संचालित किया गया। कार्यक्रम के दौरान साइबर वॉलंटियर्स और पुलिस मितान की संयुक्त टीम ने विद्यार्थियों के बीच पहुँचकर उन्हें डिजिटल दुनिया में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
साइबर ठगी के नए पैंतरों से कराया अवगत
टीम के सदस्यों ने छात्र-छात्राओं को वर्तमान समय में घटित हो रहे प्रमुख साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से समझाया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया:
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल: विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर ठग अक्सर पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते हैं। पुलिस या कोई भी कानूनी एजेंसी कभी भी ऑनलाइन कस्टडी में नहीं लेती, इसलिए ऐसे कॉल से डरने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।
ओटीपी और बैंकिंग सुरक्षा: किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपना बैंक ओटीपी (OTP), पासवर्ड या पर्सनल डिटेल साझा न करने की सख्त सलाह दी गई।
फर्जी निवेश और जॉब ऑफर: कम समय में अधिक पैसे कमाने की फर्जी निवेश योजनाओं, वर्क-फ्रॉम-होम और अज्ञात फिशिंग लिंक से दूर रहने के तरीके बताए गए।
सोशल मीडिया धोखाधड़ी और साइबर बुलिंग: सोशल मीडिया पर अज्ञात लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने, अपनी निजी तस्वीरें व जानकारी शेयर न करने और साइबर बुलिंग का शिकार होने पर सही कदम उठाने की जानकारी दी गई।
हनी ट्रैप और अनजान वीडियो कॉल: अनजान नंबरों से आने वाले वीडियो कॉल और हनी ट्रैप के नए तरीकों से बचने के गुर सिखाए गए।
हेल्पलाइन 1930 की दी गई जानकारी
साइबर ठगी या वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत कार्रवाई करने के तरीकों के बारे में बताते हुए टीम ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के उपयोग पर जोर दिया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि यदि कभी भी कोई साइबर ठगी होती है, तो बिना समय गंवाए 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते वित्तीय नुकसान को रोका जा सके।
छात्राओं को दिए गए आत्मरक्षा के टिप्स
साइबर सुरक्षा के साथ-साथ छात्राओं की शारीरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टीम द्वारा आत्मरक्षा के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए। किसी भी विषम या आपातकालीन परिस्थिति में खुद का बचाव करने के लिए पेपर स्प्रे के सुरक्षित और सही उपयोग के संबंध में व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।
प्रश्नोत्तर सत्र में दूर की गईं शंकाएं
कार्यक्रम को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखकर संवादात्मक बनाया गया। इसके लिए एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने साइबर दुनिया से जुड़ी अपनी शंकाएं और सवाल पुलिस टीम के सामने रखे। साइबर वॉलंटियर्स और पुलिस मितान टीम ने बहुत ही सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बच्चों के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए और उन्हें एक सुरक्षित व जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस जागरूकता कार्यक्रम में स्कूल के प्रभारी प्राचार्य विकास जोशी सहित शिक्षक संजीव कश्यप, गीति सिन्हा, नेहा तिवारी, आशा लकड़ा, अल्का सिंह सेंगर, राकेश पाण्डेय, युगेश्वर पाण्डेय, सृजा नायर एवं विद्यालय परिवार के अन्य शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे।
वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में साइबर वॉलंटियर एवं पुलिस मितान टीम से विभाश्री सिंह, आस्था गुप्ता, भार्गवी द्विवेदी, खुशी कन्नौजिया, अतुल गुप्ता, विक्की गुप्ता, बसंत श्रीवास्तव, अभिमन्यु विश्वकर्मा एवं विकेश रजवाड़े का विशेष योगदान रहा।

Share This Article
Leave a comment